अहमदाबाद शहर क्राइम ब्रांच ने वटवा के कुतुबनगर चौक क्षेत्र में 1992 में हुई फरजाना उर्फ शबनम की हत्या का रहस्य आखिरकार उजागर कर दिया। पुलिस ने जिस मकान में हत्या हुई थी वहां 20 फीट गहरे कुएं से मानव कंकाल बरामद किया। इसके बाद गुरुवार को बरामद अवशेषों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया है। डीएनए जांच के जरिए मृतका की पहचान की जाएगी।
अहमदाबाद शहर क्राइम ब्रांच ने वटवा के कुतुबनगर चौक क्षेत्र में 1992 में हुई फरजाना उर्फ शबनम की हत्या का रहस्य आखिरकार उजागर कर दिया। पुलिस ने जिस मकान में हत्या हुई थी वहां 20 फीट गहरे कुएं से मानव कंकाल बरामद किया। इसके बाद गुरुवार को बरामद अवशेषों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया है। डीएनए जांच के जरिए मृतका की पहचान की जाएगी।
क्राइम ब्रांच के अनुसार कुएं की खुदाई कर कंकाल बरामद किया गया। अब डीएनए नमूने मृतका के जीवित भाई से मिलान किया जाएगा। इस मामले में चार मुख्य आरोपियों में से दो की प्राकृतिक मृत्यु हो चुकी है, जबकि शमशुद्दीन और एक अन्य जीवित हैं। एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद ही औपचारिक केस दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। इसके बाद अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के समय मकान मालिक कोई और था। वर्षों तक यह राज दबा रहा।
कथित रूप से आत्मा करती थी परेशान
स्थानीय लोगों का मानना था कि मकान में मृतका की आत्मा परेशान करती है, जिसके कारण वहां कोई नहीं रहता था। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि जो महिला 34 वर्ष पहले मर गई थी उसका होने का आभास हो रहा है।
यह था मामला
मृतका फरजाना मूल रूप से शहर के पास धोलका की रहने वाली थी। बताया गया है कि उसकी दूसरी शादी शमशुद्दीन से हुई थी। उसके बाद महिला की हत्या हो गई थी। इस मामले के दो आरोपियों की मौत भी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि फरजाना का गला दबाकर हत्या की गई और शव को 20 फुट गहरे गड्ढे में दफनाकर ऊपर प्लास्टर कर दिया गया। इस संबंध में पता लगने पर खुदाई की गई और बुधवार को उसके कंकाल को निकाला गया था।