अजमेर

लॉकडाउन में अनोखी शादी : घोड़ी ना बैण्डबाजा, अंकिता को ब्याह लाए अमन दूल्हेराजा

सीकर की दुल्हन और अजमेर के दूल्हे ने बचाए परिवार के लाखों रुपए,सादगी तरीके से 10-12 परिजन के बीच रचाई शादी,लॉकडाउन की बंदिशों ने बदले कई रीति-रिवाज,पड़ोसी को भी विवाह का नहीं चला पता
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May 03, 2020
लॉकडाउन में अनोखी शादी : घोड़ी ना बैण्डबाजा, अंकिता को ब्याह लाए अमन दूल्हेराजा
अजमेर के वैशाली नगर स्थित मंगलम भवन में परिणय सूत्र में बंधते अमन व अंकिता

ajmer अजमेर. विवाह समारोह की चकाचौंध में लाखों रुपए फूंक दिए जाते हैं। शान-शौकत के आगे रुपए कोई मायने नहीं रखते। विवाह marriage के एक माह पहले से तैयारियां हो जाती है,लेकिन वैशाली नगर में शुक्रवार को एक अनोखी शादी काफी चर्चित रही। इस दौरान ना कोई बारात निकली और बैण्डबाजे की स्वर लहरियां भी नहीं गूंजी। वर घोड़ी पर सवार होकर तोरण मारने भी नहीं गया। बस एक-दो घंटे में चट मंगणी-चट ब्याह marriage हो गया।

शादी में केवल दुल्हन के माता-पिता, दूल्हे के मम्मी-पापा, ताऊ और भाई सहित कुल 10-12 लोग ही उपस्थित रहे। इस दौरान कोरोना corona महामारी के चलते लॉकडाउन के सभी नियमों की पालना की गई।

lockdown लॉकडाउन से पहले ही तय

दरअसल, वैशाली नगर निवासी नरेश अग्रवाल व मनु अग्रवाल के पुत्र अमन की शादी लॉकडाउन से पहले ही तय हो गई थी। ऐसे में विवाह समारोह स्थल, हलवाई, कैटरिंग, बैण्डबाजा व विद्युत डेकोरेशन सहित अन्य की बुकिंग हो गई थी, लेकिन सभी को निरस्त करना पड़ा।
वधु सहित केवल माता-पिता ही आए

सीकर निवासी दुल्हन के पिता

सीकर निवासी दुल्हन के पिता विनोद कुमार सिओतिया शनिवार सुबह ही अजमेर पहुंचे थे। इसके लिए पत्नी रेणु व बेटी अंकिता सहित खुद को सीकर जिला कलक्टर से अजमेर आने की अनुमति मिली थी। विवाह marriage की खास बात यह रही कि मंगलम निवास में ही सभी रस्मे पूरी की गई।

एक दिन पहले विनायक निमंत्रण, बिंदायक बिठाना, मेंहदी व हल्दी की परम्परा निभाई गई। इस बीच न कोई ढोल-ढमाके बजे और न ही मांगलिक गीत गंूजे। शनिवार को मात्र दो घंटे में विवाह marriage हो गया। सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए मुंह पर मास्क लगाए। अग्नि के समक्ष पं. लक्ष्मीनारायण ने सात फेरे कराए और वर-वधु को जीवन साथी बना दिया।

सपने में भी नहीं सोचा था...

दुल्हन के पिता विनोद कुमार ने बताया कि बेटी के विवाह marriage को लेकर कई सपने संजोए थे। विवाह में बैण्डबाजा बजेगा। हजारों लोग भोज समारोह में शामिल होंगे। दूल्हे राजा घोड़ी पर बैठकर तोरण मारने आएंगे। विवाह समारोह स्थल पर वर माला का कार्यक्रम होगा। बाराती नृत्य करते आएंगे। विद्युत डेकोरेशन से रंगबिरंगी रोशनी की चकाचौंध रहेगी,लेकिन इनमें से किसी का आयोजन नहींं हो पाया।

कुछ घंटों में ही बेटी आज पराई हो गई। हालांकि इस बात का उन्हें कोई रंज नहीं है। यदि इस तरह के सादा विवाह marriage की परम्परा शुरू हो जाए तो हमारा समाज आदर्श बन जाएगा। शनिवार को जिस सादगी के साथ बेटी के हाथ पीले किए। यह सपने में भी नहीं सोचा था।

यह तो रस्म अदायगी है...

दूल्हे अमन के पिता नरेश अग्रवाल ने कहा कि वह आज की शादी marriage के काफी खुश है। भले ही परिवार के सभी सदस्य शादी में शामिल नहीं हो पाए। मित्रों को भी आमंत्रित नहीं किया। विवाह के कार्ड तक नहीं छपवाए। ना कोई मायरा भरा और ना ही कोई महिला संगीत सहित भोज का आयोजन किया। इसके पीछे लॉकडाउन lockdown की बाध्यता वजह रही।

वैशाली नगर स्थित मंगलम निवास में ही पंडित ने अग्नि के समझ सात फेरे कराए। अग्रवाल के अनुसार उन्हें पीड़ा इस बात की है कि परिवार में करीब साठ सदस्य हैं, लेकिन आठ लोग ही शामिल हो पाए। इस marriage शादी में उन्होंने लॉकडाउन के तमाम नियमों की पालना की। आज तो शादी की केवल रस्म अदायगी थी। बाद में जब भी स्थितियां सामान्य होगी। तब सामूहिक भोज का आयोजन होगा।

Published on:
03 May 2020 01:37 am