
साइबर ठगी के आरोप में पकड़े गए युवक (Photo- Patrika)
अजमेर/ब्यावर. क्रिप्टोकरेंसी और हवाला कारोबार की आड़ में साइबर ठगी के नेटवर्क का ब्यावर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को ई-मित्र और अन्य कारोबारियों के बैंक खातों में डलवाकर नकदी हासिल करने वाले अजमेर नेटवर्क के चार गुर्गों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में गिरोह के तार विदेश में बैठे साइबर ठगों से जुड़े होने व ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार नेटवर्क में हवाला का कनेक्शन भी सामने आया है।
पुलिस अधीक्षक रतनसिंह ने बताया कि जवाजा थाना पुलिस ने जवाजा कोटड़ा हाल अजमेर घूघरा घाटी भैरूजी मंदिर निवासी राजवीरसिंह चौहान उर्फ रोहित (24), रितिक मंडोलिया (23), त्रिलोक रेगर (23) व चन्दवरदाई नगर निवासी चिराग मूलचंदानी (26) को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, साइबर ठगी की रकम व विदेश में बैठे गिरोह के सदस्यों के संबंध में जानकारी जुटा रही है। एसपी सिंह ने बताया कि आरोपी एप के माध्यम से विदेश में बैठे साइबर ठगों के संपर्क में थे। साइबर ठग भारतीयों को धमकी, प्रलोभन व निवेश का झांसा देकर उनके खातों से रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर करवाते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य ई-मित्र और अन्य कारोबारियों के खातों में रकम डलवाकर अपना कमीशन काटकर शेष राशि नकद हासिल कर लेते थे।
जवाजा थाने में ई-मित्र संचालक तुलसारसिंह ने रिपोर्ट दी कि सारोठ चौराहा स्थित ई-मित्र दुकान पर उसका भतीजा यश बैठता है। गत 28 अगस्त को दुकान पर एसयूवी में आए तीन युवकों में से रितिक नामक युवक को यश पहले से जानता था। युवकों ने नकदी उपलब्ध होने के बारे में पूछा तो ई-मित्र के लेनदेन में उपयोग होने वाला क्यूआर कोड उन्हें भेज दिया। कुछ समय बाद ही खाते में ज्योति कुमारी के नाम से 30 हजार रुपए आए। जिस पर यश ने 300 रुपए कमीशन काटकर 29,700 रुपए युवकों को दे दिए। इसके बाद सुशीला के नाम से आए 50 हजार रुपए में से 500 रुपए कमीशन काटकर 49,500 रुपए उसे दे दिए गए। अगले दिन बैंक खाते पर दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने 'होल्ड' लगा दिया। बैंक की पड़ताल में खाते में साइबर ठगी की रकम आने का पता चला। इसके बाद जवाजा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद डीएसटी, साइबर और जवाजा थाना पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की। टीम ने तीन संदिग्धों को कार में घूमते हुए डिटेन किया। पूछताछ में उनसे साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। गिरोह से जुड़े चौथे आरोपी को अजमेर से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ई-मित्र, पेट्रोल पंप सहित ऐसे कारोबारियों को निशाना बनाते थे जिनके पास डिजिटल लेनदेन और बैंक खातों के माध्यम से बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन होता है। आरोपी क्यूआर कोड हासिल कर साइबर ठगी की रकम खाते में डलवाते और कमीशन कटवाकर बदले में नकदी ले जाते। साइबर ठगी की शिकायत होने के बाद खाता संचालन पर रोक लग जाती थी।
आरोपी साइबर ठगी से हासिल नकदी से क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी खरीदते थे। फिर डिजिटल माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी विदेश में बैठे साइबर ठगों तक भेज दी जाती थी। पूछताछ में क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य से करीब 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलने की बात भी सामने आई है। जांच में आया कि गिरोह साइबर ठगी, क्रिप्टोकरेंसी व हवाला कारोबार के कनेक्शन सामने आए हैं। विदेश से हवाला कारोबार में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेश में बैठे साइबर ठगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस पड़ताल में आया कि जवाजा नेटवर्क गत 28 जुलाई को अजमेर के रामगंज थाना क्षेत्र में पकड़े गए गिरोह की दूसरी लाइन से जुड़े हैं लेकिन दोनों लाइन के नेटवर्क के सरगना कम्बोडिया, म्यामार और थाइलैंड में बैठे हैं जो साइबर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी के जरिए हासिल करते हैं। पुलिस ने नेटवर्क के सरगना लोहाखान-अजमेर निवासी शबरे आलम समेत नारेली के प्रवीण, पुष्कर के ध्रुव सुखारिया, किशनगढ़ के मनीष रेगर, आदर्श नगर-अजमेर के प्रिंस यादव, खरेखड़ी के राजेन्द्र चीता और ब्यावर जटिया कॉलोनी निवासी सुनिल जटिया को पकड़ा था।
Updated on:
03 Sept 2026 01:52 pm
Published on:
03 Sept 2026 01:52 pm
