पृथ्वीराज नगर,डीडीपुरम, महाराणा प्रताप, पंचशील ई-ब्लॉक योजना का हाल :सैकड़ों आवंटियों को नहीं मिले भूखंड, खातेदारों को भी नहीं मिली बदले में भूमि
अजमेर. आवासीय योजनाएं विकसित कर आमजन को भूखंड उपलब्ध करवाने का दावा करने वाला अजमेर विकास प्राधिकरण आमजन की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। प्राधिकरण से वर्षों पहले भूखंड लेने वाले सैकड़ों आवंटियों को तो अब तक उनके भूखंडों का कब्जा ही नहीं मिला सका। वहीं जिन खातेदारों की भूमि आवाप्त कर प्राधिकरण ने योजनाओं निकाली उनमें से पचास फीसदी खातेदार अपनी जमीन के बदले जमीन दिए जाने व मुआवजे का इंतजार कर रही है। मामले में खास यह भी है कि प्राधिकरण की चार योजनाएं ऐसी भी हैं जहां न तो बिजली पहुंचा है और न पानी। ऐसे में जिन्हें भूखंड मिल चुके हैं वे भी मकान का निर्माण नहीं कर पा रहे है। योजनाओं में बिजली पानी कब पहुंचेगा प्राधिकरण में यह बताने वाला कोई नहीं है।
पृथ्वरीराज नगर योजना :
इस योजना के लिए 2005 में माकड़वाली, चौरसियावास व आसपास के गांवों की 1100 बीघा भूमि आवाप्त की गई। 2007 में 1100 प्लॉट की यह योजना लान्ॅंच की गई। 60 फीसदी खातेदारों को भूमि के बदले भूमि दी जा चुकी है। 40 फीसदी को अभी भी इंतजार है। मुआवजा भी नहीं मिला है। अब इस योजना में केवल दो मकान बने हैं। योजना के आधे भाग में बिजली पहुंची है जबकि इस योजना में पाइप लाइन अब तक नहीं डाली जा सकी।
डीडी पुरम :
इस योजना के लिए वर्ष 2009 में 2300 बीघा भूमि आवाप्त की गई। इसमें 1600 बीघा सरकारी व 800 बीघा खातेदारी भूमि है। 4000 से अधिक भूखंड के साथ योजना वर्ष 2012 में लांच हुई। 50 फीसदी से अधिक खातेदारों को भूमि के बदले भूमि नहीं मिली। इसके चलते इस योजना के 4 ब्लॉक में विवाद चल रहा है। खातेदार खेती कर रहे है। वे कब्जा छोडऩे को तैयार नहीं है। लीज मुक्ती की भी मांग की जा रही है। योजना में न पानी पहुंचा और न बिजली। अब तक केवल दो मकान ही बने हैं।
पंचशील ई-ब्लॉक :
प्राधिकरण की पंचशील-ई ब्लॉक आवासीय योजना में पांच साल बाद भी पानी नहीं पहुंचा सका। प्राधिकरण ने बड़े-बड़े दावे करते हुए इसकी लॉटरी ऑनलाइन निकाली गई थी। प्राधिकरण के अनुसार इस योजना में सड़क,बिजली,सीवर लाइन तथा पानी की पाइन लाइन समय पर डाली जाएगी लेकिन पांच साल बाद भी यह योजना प्यासी है। यह योजना एडीए की तत्कालीन समय की सबसे महंगी योजना था। इस योजना में 238 भूखंडों की लॉटरी पांच वर्ष पूर्व निकाली गई थी। इसमें 50 वर्गगज के 38, 111.11वर्गगज के24, 138.88 वर्गगज के 109 तथा 200 वर्गगज के 67 भूखंड है। इस पांच साल बाद भी इस योजना को पानी के अभाव में विकसित नहीं किया जा सका। वर्तमान में यहां सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है लेकिन पानी के अभाव में इसका उपयोग भी संभव नहीं है।
महाराणा प्रताप नगर :
सरकारी भूमि पर काटी गई महाराणा प्रताप नगर योजना के आधेभाग में बिजली पानी पहुचं चुका है। लेकिन जलदाय विभाग शेष भाग में पानीं पहुंचाने के लिए राशि की मांग कर रहा है। जहां पानी की सप्लाई हो रही है वहां प्रेशर कम है।
अफोर्डेबल हाउसिंग योजना :
ब्यावर रोड पर वर्ष 2011 में कम आय वर्ग के लोगों के लिए लॉन्च की गई अफोर्डेबल हाउसिंग योजना का निर्माण 6 साल की देरी से चल रहा है। ठेकदार पर पेनाल्टी लगाने के बाद भी दोबारा काम शुरु नहीं हुआ। योजना में बिजली पहुंचाने का काम चल रहा है लेकिन पानी कब आएगा पता नहीं।
पत्र से पानी पिला रहा एडीए :
अजमेर विकास प्राधिकरण के सचिव इन्द्रजीत सिंह ने ई-ब्ल्ॉाक योजना में पाईप लाइन डालने के लिए जलदाय विभाग को पत्र लिखा है। सचिव के अनुसार प्राधिकरण की ई-ब्लॉक योजना में भूखंडों का आवंटन भूखंडाधारियों को किया जा चुका है। जिसमें विकास कार्य के तहत पानी की पाइप लाइन बिछाने का कार्य कराया जाना प्रस्तावित है। इसलिया योजना के मानचित्र के अनुसार पाइप लाइन के लिए तकमीना तैयार कर शीघ्र भिजवाया जाए। जिससे इसकी राशि जमा करवाई जा सके।
पानी के लिए फुटबॉल बनी है एडीए की योजनाएं :
एडीए की पृथ्वीराज नगर योजना,महाराणा प्रताप नगर योजना,डीडी पुरम योजना तथा ट्रांसपोर्ट नगर, तबीजी अफोर्डेबल योजना पानी के लिए पिछले करीब 7-8 वर्ष से फुटबॉल बनी हुई है। इन योजनाओं में पानी पहुंचाने के लिए जलदाय विभागा करोड़ों रुपए की डिमांड प्राधिकरण को थमा चुका है। इसके बीसलपुर कॉस्ट, सुपरविजन, पम्प हाउस सहित अन्य चार्ज जोड़े जाते हैं। प्राधिकरण इसे जमा करवाने में असमर्थता जताता रहा है। मामला सरकार व मुख्य सचिव के समक्ष भी कई बार उठ चुका है लेकिन नीतिगत निर्णय नहीं हुआ। स्मार्ट सिटी के तहत इन योजनाओं में पानी पहुंचाने का निर्णय हुआ लेकिन अब तक ट्रांसपोर्ट नगर योजना तथा अफोर्डेबल योजन में पानी पहुंचाने के लिए सहमति जारी हुई है वह भी स्मार्ट सिटी के द्वितीय चरण में जबकि अभी पहले चरण का ही पता नहीं है।