Ajmer Dargah News : अफगानिस्तान और भारत के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अफगान ने अजमेर में एक स्मारक बनाने की योजना बनाई है। अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से अफगानिस्तान की ओर से यह स्मारक स्थापित किया जाएगा।
अजमेर. अफगानिस्तान और भारत के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अफगान ने अजमेर में एक स्मारक बनाने की योजना बनाई है। दिल्ली में हुई तीन दिवसीय सेमिनार ‘गरीब नवाज ए ब्रिज बिटविन हेरात एंड अजमेर’ में अफगानिस्तान की ओर से इसका प्रस्ताव रखा गया है। अजमेर दरगाह के खादिम और चिश्ती फांडेशन के अध्यक्ष सैयद सलमान चिश्ती ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की अनुमति मिलने के बाद अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से अफगानिस्तान की ओर से यह स्मारक स्थापित किया जाएगा। सेमिनार में शामिल होने आया अफगानिस्तान का दल बुधवार रात अजमेर पहुंचा। चिश्ती ने बताया कि सेमिनार में १५ लोग अफगानिस्तान के और १० लोग दिल्ली के शामिल हुए। सभी २५ लोगों के दल ने बुधवार को अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह जियारत की। इस दौरान महफिल का आयोजन भी किया गया।
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राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार को अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी दी। राज्यपाल सुबह 11.30 बजे पत्नी व बेटे के साथ दरगाह पहुंचे। उन्होंने यहां ख्वाजा साहब के मजार पर मखमली चादर और फूल पेश की देश-प्रदेश में शांति और भाईचारे की दुआ की। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लोग समृद्धशाली हों और हम सब देश को आगे बढ़ाने में सहयोगी मिले, यही दुआ लेकर दरगाह आया हूं। मिश्र ने कहा कि यहां से मुझे हमेशा आशीर्वाद मिलता रहा है, इसलिए पूरा विश्वास है कि गरीब नवाज उनकी दुआ जरूर कबूल करेंगे। राज्यपाल मिश्र को खादिम सैयद अब्दुल बारी चिश्ती और सैयद मुकद्दस मोइनी ने जियारत कराई। खादिमों की संस्था अंजुमन के सदर सैयद मोइन हुसैन चिश्ती, सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगारा शाह आदि ने दस्तारबंदी की। दरगाह के बुलंद दरवाजे पर दरगाह नाजिम शकील अहमद ने उनका इस्तकबाल किया। दीपावली अवकाश के चलते इन दरगाह में जायरीन की जबरदस्त आवक है। इस कारण जहां जहां से राज्यपाल गुजरे वहां कुछ देर के लिए जायरीन को रोकना पड़ा।