
हॉर्ट पेशेंट वरिष्ठ अध्यापिका के ट्रांसफर आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे, पत्रिका फाइल फोटो
Court Relief to Teacher: अजमेर में पदस्थापित हृदय रोग से पीड़ित वरिष्ठ अध्यापिका की प्राध्यापक पद पर पदोन्नति होने पर निदेशालय द्वारा उसे पदोन्नत स्थान पर कार्यग्रहण करने के लिए जबरन कार्यमुक्त करने के एक मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ ने रोक लगाई है। संबंधित कार्मिक हृदय रोग से ग्रस्त है और ऐसे कार्मिकों को पदस्थापन अथवा स्थानांतरण आदि के मामलों में राहत देने के स्पष्ट निर्देश हैं।
नियमों राहत देने के प्रावधान के बावजूद संबंधित कार्मिक को अजमेर से सीमलवाड़ा (डूंगरपुर) भेजने पर पीड़ित वरिष्ठ शिक्षिका ने हाइकोर्ट में याचिका लगाई। इस पर हाईकोर्ट ने स्थगन जारी कर प्रतिवादीगण को उसका अभ्यावेदन विचारित करने के निर्देश दिए हैं।
राजकीय सेंट्रल गर्ल्स स्कूल, अजमेर की वरिष्ठ अध्यापिका इन्द्रा त्रिपाठी की निदेशालय के 18 अप्रेल के आदेश से प्राध्यापक (हिन्दी) के पद पर पदोन्नति की गई थी। पदोन्नत कार्मिकों के पदस्थापन के लिए निदेशालय द्वारा भरवाए गए ऑप्शन फॉर्म में त्रिपाठी ने स्वयं के हृदय रोगी होने का अंकन करते हुए दस्तावेज भी लगाए थे।
ऐसे मामलों में कर्मचारियों को उनके निकटतम स्थानों पर पदस्थापित करने का प्रावधान है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसी बीच निदेशालय के 12 मई के आदेश से कार्मिक को गोविंद गुरु उमावि बांसिया, सीमलवाड़ा (डूगंरपुर) में पोस्टिंग देकर सेंट्रल गर्ल्स स्कूल से 15 मई को रिलीव कर दिया गया।
पीड़ित महिला कार्मिक द्वारा सीमलवाड़ा के पोस्टिंग आदेश को चुनौती देते हुए एड.विशाल जांगिड़ के माध्यम से राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में याचिका पेश की गई। जांगिड़ ने याचिका में बताया कि हृदय रोगी महिला प्राध्यापक को अजमेर शहर में हिन्दी प्राध्यापक के 10 पद खाली होने के बावजूद नियमानुसार राहत प्रदान नहीं कर सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज दिया गया। याचिका में त्रिपाठी के संबंध में जारी दोनोंं आदेश निरस्त कर अजमेर में पदस्थापित करने का अनुरोध किया गया।
हाइकोर्ट जोधपुर में जस्टिस अरुण मोंगा की एकल पीठ ने याचिकार्थी के वकील के तर्कों से सहमत होकर समान प्रकृति के पूर्व में निर्णीत एक अन्य प्रकरण पूनमाराम बनाम राजस्थान सरकार में पारित निर्णय से प्रकरण कवर करते हुए दोनों विवादित आदेशों पर रोक लगाते हुए शिक्षा निदेशक को कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन विचारित कर राहत पहुंचाने के निर्देश जारी किए हैं।
Updated on:
31 May 2026 01:30 pm
Published on:
31 May 2026 01:30 pm
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