
श्रीरामपुरा में पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी का घर, जहां वारदात अंजाम दी गई। पत्रिका
Ajmer murder case: अरांई। कुछ दिन पहले तक जिस आंगन में सुबह से शाम तक लोगों की आवाजाही रहती थी, और चाय की चुस्कियों के बीच गांव और राजनीति की चर्चाएं होती थीं, आज वहां सन्नाटा पसरा है। श्रीरामपुरा गांव में बोराड़ा के पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी का घर अब एक दर्दनाक त्रासदी की खामोश गवाही देता नजर आ रहा है। बंद कमरों पर लटके ताले, सूना आंगन और वीरान चौखटें मानो परिवार के बिखराव की कहानी बयां कर रही हैं, जो एक ही रात में खत्म हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस घर में रामसिंह चौधरी, उनकी पहली पत्नी सुनीता, पुत्री सरिता, पुत्र, दूसरी पत्नी सुरज्ञान देवी, मां पूसी देवी और मौसेरी बहन महिमा सहित सात सदस्य रहते थे। लेकिन अब घर की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। रामसिंह, मां पूसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान और महिमा की हत्या हो चुकी है, जबकि पहली पत्नी सुनीता और पुत्री सरिता हत्या के आरोप में गिरफ्तार हैं। विधि-विरुद्ध संघर्षरत किशोर को भी पुलिस ने निरुद्ध कर लिया है। ऐसे में अब घर पूरी तरह वीरान हो गया है।
ग्रामीण बताते हैं कि रामसिंह व उनकी मां पूसी देवी पूर्व सरपंच, जबकि दूसरी पत्नी सुरज्ञान देवी जिला परिषद सदस्य थीं। राजनीति और सामाजिक सक्रियता के कारण उनके घर पर दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। इससे यहां हमेशा चहल-पहल रहती थी, लेकिन अब मातम और खामोशी के सिवा कुछ नहीं बचा।
शुक्रवार को भी गांव की चौपालों और गलियों में इस वारदात की चर्चा होती रही। ग्रामीणों की आंखों में दर्द साफ नजर आया। लोग इसे केवल हत्याकांड नहीं, बल्कि रिश्तों के बिखरने की ऐसी भयावह त्रासदी मान रहे हैं जिसने एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
वारदात के बाद घर को पुलिस जांच के चलते सील कर दिया गया है। ऐसे में परिवार के मवेशियों और कृषि कार्य पर भी संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने पशुओं के चारे-पानी की जिम्मेदारी संभाल रखी है। पुलिस की अनुमति से गांव का एक व्यक्ति घर में जाकर पिछले दो दिन से पशुओं की देखभाल कर रहा है।
परिवार का पॉलीहाउस भी अब वीरान पड़ा है। यहां खीरा, ककड़ी, हरा धनिया सहित अन्य फसलें उगाई जा रही थीं। लेकिन वारदात के बाद से वहां कोई काम नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि दो दिन से देखरेख नहीं होने के कारण फसलें खराब होने लगी हैं।
चौहरे हत्याकांड में मृत रामसिंह, सुरज्ञान देवी और पूसी देवी के शवों का पोस्टमार्टम के बाद श्रीरामपुरा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इन्हें रामसिंह के चचेरे भाई गजराज ने मुखाग्नि दी। वहीं मौसेरी बहन महिमा का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव सनोद में किया गया। परिवार के कुल सात सदस्यों में से चार दुनिया छोड़ चुके हैं और तीन कानूनी कार्रवाई की गिरफ्त में हैं। ऐसे में अब शोक संबंधी रस्मों और सामाजिक जिम्मेदारियों को रामसिंह के चाचा-ताऊ और अन्य परिजन निभा रहे हैं।
वारदात के बाद गांव में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का पहुंचना जारी है। शुक्रवार को पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया, सुरेश टांक और कांग्रेस नेता जसराज चौधरी ने गांव पहुंचकर शोकाकुल परिजन से मुलाकात और संवेदनाएं व्यक्त कीं। भाजपा नेता कैलाश चौधरी सहित अन्य सामाजिक संगठनों के लोग भी गांव पहुंचे और परिवार के प्रति दुख जताया।
श्रीरामपुरा प्रकरण में विधि-विरुद्ध संघर्षरत किशोर को बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे आगामी कार्यवाही के लिए सुधार गृह भेज दिया गया।
Updated on:
30 May 2026, 12:46 PM IST
Published on:
30 May 2026, 12:44 PM IST
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