राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी मना रहा है रजत जयंती वर्ष
अजमेर (Ajmer news). राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी अजमेर द्वारा अब तक 26 उन्नत किस्में विकसित की गई हैं। साथ ही 35 से अधिक तकनीक व्यावसायिक रूप से हस्तांतरित की गईं, जबकि 30 टन से अधिक गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, 2000 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इससे 5 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ है।
इस केन्द्र की स्थापना 19 जनवरी 2000 को हुई। संस्थान अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। यह बीजीय मसाला फसलों के जर्मप्लाज्म संरक्षण, फसल सुधार, उत्पादन तकनीकों के विकास तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर कार्य करता है। केंद्र के पास लगभग 2400 जर्मप्लाज्म अभिगमनों का संग्रह है। यह राष्ट्रीय सक्रिय जर्मप्लाज्म स्थल के रूप में कार्य करता है। यह बात गुरुवार को तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने कही।
उन्होंने बताया कि बीजीय मसालों में पाए जाने वाले जैव सक्रिय यौगिक जैसे मेथी में 4-हाइड्रॉक्सी-आइसोल्यूसिन, धनिया में डायोजेनिन, जीरा में क्यूमिनाल्डिहाइड, सौंफ में एनेथोल, कलौंजी में थायमोकिनोन, अजवाइन में थाइमोल तथा सोआ में डी-कार्वाेन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये यौगिक बीजीय मसालों को न्यूट्रास्यूटिकल एवं औषधीय उत्पादों के रूप में महत्वपूर्ण बनाते हैं।
उन्होंने बताया कि संस्थान ने जलवायु-सहिष्णु किस्मों का विकास किया है। इनमें सूखा सहनशील अजवाइन (एए-93), प्रारंभिक परिपक्व अजवाइन (एए-2), वर्षा आधारित अजवाइन-अजमोदा (एसीईएल-एक) स्टेम गॉल प्रतिरोधी धनिया (एसीआर-1), पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोधी हरा धनिया (एजीसीआर-1) तथा ग्रीष्मकालीन मेथी (एएफजी- 4) प्रमुख हैं। इसके साथ ही सटीक कृषि तकनीकें, ड्रिप फर्टिगेशन, प्लास्टिक मल्चिंग, उन्नत नर्सरी प्रबंधन तथा ट्रांसप्लांटिंग तकनीक विकसित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि सतत कीट प्रबंधन के लिए संस्थान ने वनस्पति आधारित कीटनाशक, नीम आधारित साबुन, करंज-गंधक अर्क, पाइंस रेजिन नैनो-इमल्शन तथा जैविक एंटोमोपैथोजन मिश्रण विकसित किए हैं। ये रासायनिक उपयोग को कम करते हुए कीट नियंत्रण में प्रभावी हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा विकसित मूल्य संवर्धित उत्पादों मसाला पाउडर, न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद, आवश्यक तेल एवं ओलियोरेजिन तथा कॉस्मेटिक उत्पाद से कच्चे मसालों की तुलना में लगभग 300 प्रतिशत तक अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश है। वर्तमान में देश में लगभग 44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मसालों की खेती होती है तथा 111.55 लाख टन उत्पादन के साथ इसका वार्षिक मूल्य लगभग 37,000-40,000 करोड़ रुपए है। तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने बताया कि वैश्विक स्तर पर भारत का 48 प्रतिशत उत्पादन एवं 43 प्रतिशत मूल्य हिस्सेदारी है।
देश से 160 से अधिक देशों में 15-18 लाख टन मसालों का निर्यात होता है। इस क्षेत्र से लगभग 1.9 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। पिछले दो दशकों में मसाला क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें उत्पादन में 186 प्रतिशत, क्षेत्रफल में 86 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 54 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि भारत में बीजीय मसालों का लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। वैश्विक उत्पादन में इनकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। निर्यात बाजार में भारत का लगभग 70 प्रतिशत प्रभुत्व है तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों से लगभग 4,500 करोड़ का वार्षिक व्यवसाय होता है।
बीजीय मसाला क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें जलवायु परिवर्तन, जलसंकट, भूमिक्षरण, कीट-रोगों का बढ़ता दबाव, गुणवत्ता संबंधी समस्याएं, मिलावट, अवशेषों की समस्या तथा निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों की कमी प्रमुख हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च गुणवत्ता उत्पादन, ट्रेसबिलिटी प्रणाली, अच्छे कृषि अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, मूल्य संवर्धन तथा ब्रांडिंग आवश्यक है।
भविष्य की रणनीति में जीनोमिक्स आधारित प्रजनन, जीन संपादन (सीआरआईएसपीआर), जीनोमिक चयन, डिजिटल कृषि, ब्लॉक चेन ट्रेसबिलिटी, आईओटी आधारित निगरानी, जैविक खेती तथा जलवायु-सहिष्णु किस्मों का विकास शामिल है।
तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेला शनिवार को आयोजित किया जाएगा। संस्थान के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती संबंधी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। केन्द के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर से 2000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। इंडस्ट्री मीट का शुभारम्भ सुबह 9 बजे होगा, जबकि किसान मेला सुबह साढ़े 11 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी होंगे। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के विचार-विमर्श, तकनीकी प्रस्तुतियां, प्रौद्योगिकी पुस्तिका का डिजिटल विमोचन तथा विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के बीच एमओयू भी होंगे।