वसुंधरा राजे सरकार ने प्रदेश में नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनी थी। अजमेर के राजकीय संग्रहालय का समय बदला गया। पुष्कर घाटी क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही से लेजर लाइट में दिक्कतें बढ़ गई। दोनों ही प्रयासों में पर्यटकों के कदम नहीं बढ़े। इसलिए नाइट पर्यटन योजना फ्लॉप हो गई।
अजमेर. राज्य सरकार की नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना शहर में फ्लॉप हो गई है। नया बाजार स्थित राजकीय संग्रहालय को रात्रि में आमजन और पर्यटकों के लिए खोलने और साउंड शो बंद पड़ा है। महाराणा प्रताप स्मारक पर लेजर लाइट शो भी ताले में बंद है।
पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने प्रदेश में नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई थी। इसमें अजमेर के राजकीय संग्रहालय को शामिल किया गया। योजना के तहत आमजन और पर्यटकों को रात को पर्यटक और पुरा महत्व की इमारतों-सामग्री से रूबरू कराना था। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने संग्रहालय का समय बदल कर दोपहर 12 से रात्रि 8 बजे भी किया था।
लाइट एंड साउंड शो बंद
साल 2013 में संग्रहालय में पूर्व पर्यटन मंत्री बीना काक ने लाइट एंड साउंड शो का उद्घाटन किया था। शो में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जीवन गाथा और अन्य घटनाओं की जानकारी दी जाती थी। शुरुआत से घाटे में बढ़ोतरी, स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते निदेशालय ने साल 2018 में इसको बंद कर दिया था। नाइट टूरिज्म योजना भी फ्लॉप हो गई। न पर्यटकों और न स्थानीय लोगों ने रात में संग्रहालय की तरफ रुख किया।
घाटी ने बढ़ाई लेजर शो की दिक्कतें
पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक के सामने पहाड़ी पर थ्रीडी लेजर लाइट शो 2016-17 शुरू किया गया था। महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा को दिखाया गया। घाटी क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही से लेजर लाइट में दिक्कतें बढ़ गई। तकनीकी समस्या होने के कारण शो बंद हो गया। प्रशासन अथवा सरकार ने बीते सात-आठ साल में शो को दोबारा शुरू करना मुनासिब नहीं समझा है।
फैक्ट फाइल
50 लाख पर्यटक आते हैं प्रतिवर्ष अजमेर में
15 वीं शताब्दी में बना है राजकीय संग्रहालय
2016-17 में प्रताप स्मारक का शुभारंभ
500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्मारक
1 अथवा 2 दिन रुकते हैं पर्यटक अजमेर में
एक्सपर्ट कमेंट
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लेजर और लाइट एंड साउंड शो वापस शुरू किए जाने चाहिए। इससे नाइट टूरिज्म बढ़ने से साथ राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए नए सिरे से योजना बनाई जा सकती है।
प्रो. शिवदयाल सिंह, पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष मदस विवि
पढ़ें यह खबर भी: बढ़ रहे बालू रेत के टीबे, मिट्टी में खारापन
जिले में जैव विविधता पर असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे बालू रेत के टीबे, मिट्टी में खारापन और तापमान बढ़ है। अरावली में अवैध खनन, कृषि भूमि पर बढ़ते आवासीय क्षेत्र और वायु-जल प्रदूषण भी पर्यावरण को बिगाड़ने में पीछे नहीं है।
15 से 20 किमी तक फैले टीबे
तीर्थराज पुष्कर सहित अजमेर के आसपास के इलाकों में 25-30 साल पहले तक रेत के छोटे टीबे थे। इनका फैलाव 5 से 7 किलोमीटर तक था। अब पुष्कर सहित अजमेर में माकड़वाली-होकरा, कायड़, जनाना रोड-सीकर रोड इलाके में रेतीले टीबों का दायरा जिले में 15 से 20 किलोमीटर तक फैल चुका है।
बढ़ता कचरा, नहीं बना रहे बिजली
प्रतिमाह प्लास्टिक की थैलियों, कागज, कांच, टायर, पेड़-पौधों के पत्तों, फल-सब्जी के छिलके, घास-फूस, गत्ते, गुटखे के पाउच और अन्य रूप में करीब 60 से 70 टन कचरा निकल रहा है। इसे एकत्रित कचरे को सेदरिया ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाता है। 30 प्रतिशत कचरा खाली प्लॉट, मैदानों, नालों में फैल रहा है। देश में कई शहरों में कचरे से बिजली उत्पादन किया जा रहा है।