अजमेर

International Adoption: ममता ने मिटा दी हर दूरी, अजमेर की दृष्टि बाधित बिटिया को स्पेन में मिल गई नई ‘मां’

Ajmer Adoption Story: कहते हैं, प्यार की कोई भाषा नहीं होती। अपनापन मिले तो शब्द अपने आप समझ आने लगते हैं। अजमेर के शिशु गृह में रह रही 6 वर्षीय मासूम की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही नई शुरुआत की गवाह बनी।
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Jul 03, 2026
Adoption Success Story
Indian Girl Adopted by Spanish Woman, patrika photo

Ajmer Adoption Story: कहते हैं, प्यार की कोई भाषा नहीं होती। अपनापन मिले तो शब्द अपने आप समझ आने लगते हैं। अजमेर के शिशु गृह में रह रही 6 वर्षीय मासूम की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही नई शुरुआत की गवाह बनी। दाहिनी आंख में विजन लॉस की समस्या के कारण जन्म देने वाले माता-पिता से बिछड़ी और लंबे समय तक दत्तक ग्रहण का इंतजार करती रही।
अब मासूम बालिका को आखिरकार स्पेन में नया परिवार मिल गया। गुरुवार को जिला कलक्टर लोकबंधु ने विधिवत प्रक्रिया पूरी कर मासूम को उसकी स्पेनिश मां के सुपुर्द कर दिया। कुछ ही दिनों में वह अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए स्पेन रवाना होगी।

दो साल तक इंतजार, फिर मिली मां की ममता

पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि 2024 में चार साल की उम्र में बालिका को शिशु गृह अजमेर में दाखिल कराया गया था। उसकी दाहिनी आंख में विजन लॉस की समस्या थी। इसी कारण लंबे समय तक उसे कोई दत्तक परिवार नहीं मिला। देश और विदेश से आए कई संभावित दत्तक अभिभावकों ने उसको नकारते हुए अन्य बच्चों का चयन किया, लेकिन शिशु गृह में पल रही मासूम का इंतजार जारी रहा।

आखिरकार स्पेन की एक अविवाहित महिला ने उसको अपनाने का निर्णय लिया और करीब दो वर्ष तक चली कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने बालिका को स्पेनिश एकल मां के दत्तक ग्रहण की स्वीकृति प्रदान कर दी। बालिका को दत्तक मां के सुपुर्द करने के दौरान जिला कलक्टर लोकबंधु के साथ में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक संजय साबलानी, छात्रावास अधीक्षक रश्मि वर्मा तथा शिशु गृह प्रबंधक फरहाना खान उपस्थित रहे।

बेटी के लिए सीखी हिन्दी, ट्रांसलेटर बना साथी

स्पेन में एक निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत दत्तक मां ने केवल गोद लेने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं की, बल्कि बेटी से जुड़ने के लिए हिन्दी बोलना भी सीख लिया। जहां किसी शब्द को समझने में दिक्कत होती है तो वह हिन्दी से स्पेनिश ट्रांसलेटर की मदद से मासूम से संवाद करती। पहली मुलाकातों में मां के यह प्रयास दोनों के बीच अपनापन बनने का सबसे बड़ा माध्यम बना।

पीछे छूट गई पुरानी यादें

शिशु गृह प्रबंधक फरहाना खान ने बताया कि बालिका जन्म देने वाले माता-पिता के नाम जानती है, लेकिन उसे यह याद नहीं कि वह कहां से आई या किन परिस्थितियों में शिशु गृह पहुंची। नई मां का स्नेह मिलने के बाद अब वह उत्साह के साथ अपने नए जीवन की ओर बढ़ रही है। भाषा का अंतर भी उसके चेहरे की मुस्कान के सामने छोटा पड़ गया।

विदेश तक पहुंची कई नई जिंदगी

अजमेर शिशु गृह से विदेशी परिवारों में दत्तक ग्रहण का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी यहां के कई बच्चे अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों के परिवारों का हिस्सा बन चुके हैं। अब यह मासूम भी अपने नए परिवार के साथ स्पेन में नई उम्मीदों और नए सपनों के साथ जीवन की नई शुरुआत करेगी।

स्पेन की संस्था ने निभाई अहम भूमिका

शिशु गृह की प्रबंधक फरहाना खान ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में स्पेन की नमस्ते संस्था ने समन्वय किया, जो वहां के दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से संबद्ध है। स्पेनिश मां ने 2024 में बालिका को गोद लेने की इच्छा जताई थी। दस्तावेजी जांच, काउंसलिंग और अन्य औपचारिकता सहित सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बालिका को उनके सुपुर्द किया गया। जब बच्चे को ममता मिलती है तो भाषाएं दूरी कभी आड़े नहीं आती है।

Published on:
03 Jul 2026 07:48 am