
जगन गुर्जर। फाइल फोटो- पत्रिका
अजमेर। प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या के बाद जेल प्रशासन की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के तीन दिन बाद भी अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वारदात में किस स्तर पर ‘लापरवाही’ बरती गई। किसी की जिम्मेदारी भी तय नहीं हो सकी। दूसरी ओर न्यायिक जांच के समानांतर सिविल लाइंस थाना पुलिस का अनुसंधान तेजी से आगे बढ़ रहा है। शुरुआती जांच में ही हाई सिक्योरिटी जेल में सुरक्षा व्यवस्था की कई खामियां सामने आई हैं।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि जेल रिकॉर्ड के अनुसार वार्ड नम्बर 2 के ब्लॉक नम्बर 4 की सेल नम्बर 5 जगन गुर्जर को आवंटित थी, जबकि आरोपी विष्णु को सेल नम्बर 3 मिली हुई थी। इसके बावजूद दोनों को एक ही सेल में कैसे रखा गया। यह भी खुलासा हुआ है कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच जेलकर्मी अपने स्तर पर बंदियों को एक-दूसरे की सेल में बंद कर देते थे। इसी दौरान कथित तौर पर जगन के कहने पर विष्णु को उसकी सेल नम्बर 5 में बंद किया गया था।
प्रारंभिक पड़ताल के अनुसार जगन ने घुटने के दर्द का इंजेक्शन लगवाया। इसके बाद विष्णु के साथ लूडो भी खेला। सेल में दवा लेने उठे विष्णु ने पीछे से गमछे से जगन गुर्जर के गले में फंदा कस दिया। दोपहर 3 बजे सेल खोले जाने तक किसी को वारदात की भनक नहीं लगी।
वार्ड नम्बर 2 में चार ब्लॉकों की निगरानी के लिए चार प्रहरी तैनात थे। ब्लॉक नम्बर 1 और 4 की जिम्मेदारी सुरेन्द्र और जितेन्द्र के पास थी। पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज किए हैं। दोनों ने वारदात की जानकारी होने से इन्कार करते हुए कहा कि बंदियों को सेल में बंद करने के बाद वे वार्ड के कॉमन गलियारे में आ गए। हालांकि जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि करीब 4 घंटे तक किसी भी प्रहरी ने सेल के भीतर होने वाली गतिविधि पर नजर क्यों नहीं डाली।
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हाई सिक्योरिटी जेल में 318 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनकी निगरानी में वार्ड, ब्लॉक और हार्डकोर बंदियों की सेल भी शामिल हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि घटना के समय जगन की सेल का कैमरा चालू था या बंद। जेल प्रशासन के बयानों और बातचीत में कभी जगन गुर्जर की सेल का कैमरा बंद बताया जाता है तो कभी चालू होने की बात कही जाती है। इसके बाद कैमरे के लैंस पर टूथ पेस्ट लगाए जाने की बात कही जाती है। यदि ऐसा था तो सीसीटीवी कंट्रोल रूम में निगरानी पर बैठे अधिकारियों को जानकारी क्यों नहीं मिली और कैमरे से छेड़छाड़ कब और किसने की, यह भी जांच का विषय है। हालांकि पुलिस ने जेल से वार्ड के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए हैं। पुलिस फुटेज का विश्लेषण करने में जुटी है।
हाई सिक्योरिटी जेल में घटनास्थल का मौका मुआयना कर नक्शा तैयार किया गया है। विष्णु को आगामी दो दिन में कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट लेकर प्रकरण में गिरफ्तार किया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद प्रकरण की दिशा तय हो सकेगी।
Updated on:
02 Jul 2026 03:34 pm
Published on:
02 Jul 2026 06:00 am
