गूंजे बासंती गीत, झूमे अकीदतमंद
अजमेर. उर्स के दौरान महफिलखाने में दरगाह दीवान की सदारत में होने वाली महफिल की व्यवस्था मौरूसी अमले की ओर से की जाती है।
हाजी मोहम्मद शब्बीर खान ने बताया कि महफिलखाने में विशेष रूप से तैयार झालरदार शामियाने बांधे जाएंगे। इसके लिए चांदी की लगभग 15 फीट की 8 बल्लियां (चौब) लगाई जाएगी। मोमबत्ती के लिए भी चांदी के झाड़ का उपयोग किया जाता है। सभी सामान दरगाह कमेटी की ओर से मौरूसी अमले को उपलब्ध कराया जाएगा। शाही महफिल में फर्राश, फलीता सोज, रकाबदार, चौबदार, फानूसवाला, सकजन, फातिहाखां, नक्कारची, घडिय़ाल आदि मौरूसी अमले के सदस्य अपनी सेवाएं देते हैं।
गूंजे बासंती गीत, झूमे अकीदतमंद
ख्वाजा साहब की दरगाह में हर साल की तरह इस बार भी बसंत मनाया गया। इसके तहत सोमवार को शाही चौकी के कव्वाल असरार हुसैन और उनके परिवार के लोगों ने दरगाह में जुलूस के रूप में बसंत पेश किया। उन्होंने हजरत अमीर खुसरो के लिखे बसंत के गीत गाकर हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
जन-जन तक पहुंचाएं गरीब नवाज का पैगाम
अजमेर. ख्वाजा साहब के 810वें उर्स के मौके पर अंजुमन सैयदजादगान की ओर से मोइनिया हॉल में गरीब नवाज कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें अंजुमन सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने कहा कि गरीब नवाज ने हमेशा अमन और भाईचारे का पैगाम दिया है। उनकी शिक्षाओं को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। कार्यक्रम में रजा एकेडमी के महासचिव मौलाना सईद नूरी, राजस्थान मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मौलाना फजले हक, सैयद फुजैल चिश्ती, अंजुमन के उपाध्यक्ष सैयद तौफीक चिश्ती, सह सचिव सैयद मुसब्बीर हुसैन सहित अन्य शामिल हुए।