अजमेर

विधानसभा चुनाव…भ्रष्टाचार और समस्याएं सबसे बड़े मुद्दे, सरकार की राह है कठिन

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Sep 02, 2018
issues in assembly election
issues in assembly election

अजमेर.

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अंदरूनी स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। दोनों प्रमुख सियासी दलों से जुड़े नेताओं, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी भी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

अजमेर जिले में मसूदा, केकड़ी, ब्यावर, किशनगढ़, पुष्कर, नसीराबाद, अजमेर उत्तर, अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र हैं। जबकि अजमेर संभाग में जयपुर जिले का दूदू, भीलवाड़ा, टोंक और नागौर के विधानसभा क्षेत्र भी आते हैं। सियासी दलों को प्रमुख रूप से अजमेर शहर को 24 घंटे जलापूर्ति, भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी ही प्रमुख मुद्दे नजर आ रहे हैं।

सीएम की घोषणा को ठेंगा...

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दो वर्ष पूर्व अजमेर में 24 घंटे जलापूर्ति की घोषणा की थी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अफसरों ने इसको अंजाम तक नहीं पहुंचाया है। कभी तकनीकी संसाधन तो कभी बजट की कमी बताकर इसको अटकाया जा रहा है। बीसलपुर बांध में पानी की कमी, लाइनों में लीकेज जैसे तर्क भी दिए जाते हैं। खुद सीएम, जिले के प्रभारी मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी बैठकों में चर्चा कर चुके हैं। विपक्षी दल विधानसभा चुनाव में इसको प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं।

भ्रष्टाचार और महंगाई पर वार

विपक्षी दल पिछले पांच साल से राज्य सरकार को भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर घेरते रहे हैं। करोड़ों रुपए का खनन घोटाला, बजरी घोटाला, शहरों और ग्रामीण इलाकों में बेशकीमती भूमि के बेचान, कथित तौर पर मनचाही कम्पनियों को जमीन आवंटन जैसे आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, एलपीजी की बढ़ती कीमतों, दाल, सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ोतरी पर भी विपक्ष हमले बोलता रहा है।

निजी हाथों में बिजली सप्लाई

राज्य सरकार ने अजमेर डिस्कॉम की बिजली सप्लाई का काम निजी कम्पनी को सौंप दिया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों ले सकते हैं। निजी कम्पनी के घरेलू, व्यावसायिक और कृषि कनेक्शन में मनमानी राशि वसूली, ज्यादा कीमतों पर मीटर, तार और विद्युत उपकरण खरीदने, बिजली की दरों में मनचाही बढ़ोतरी के मुद्दे लगातार बने हुए हैं। अजमेर डिस्कॉम पर तो कई बार प्रदर्शन भी हो चुके हैं।

सरकार बताएगी उपलब्धियां...

सरकार अपने पांच साल का लेखा-जोखा लेकर जनता के बीच जाएगी। भामाशाह कार्ड, बालिकाओं को छात्रवृत्तियां और साइकिल वितरण, स्कूल में दूध वितरण, पैंशन योजना, शिक्षकों और विद्यार्थियों को लेपटॉप, सरकारी स्कूल के होनहार बालक-बालिकाओं को विदेश यात्रा, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के टॉपर्स को कॉलेज में नि:शुल्क शिक्षा, सरकारी महकमों में विभागवार पदोन्नतियां, सीबीएसई की तर्ज पर विवेकानंद मॉडल स्कूल की स्थापना जैसे कार्य गिना सकती है। केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट,हृदय योजना, डोर टू डोर सफाई, हेरीटेज सिटी जैसे मुद्दों पर जनता के बीच रखा जा सकता है।

Updated on:
01 Sept 2018 05:03 am
Published on:
02 Sept 2018 09:05 am