अजमेर

बड़ा मुद्दा…इन कॉलेज को कौन रखवाला, ना यूजीसी ना सरकार को है परवाह

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Feb 26, 2019
budget for law college
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अजमेर.

प्रदेश में विधि शिक्षा की हालत ठीक नहीं है। लॉ कॉलेज को यूजीसी में पंजीकृत नहीं होने का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ना इन्हें राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान में बजट मिलता है, ना ही सरकार कोई सहायता दे रही है। कॉलेज में विकास कार्य ठप हैं। लेकिन किसी को इसकी फिक्र नहीं है।

वर्ष 2005-06 में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। इनमें अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, सिरोही, बूंदी, कोटा, झालावाड़ और अन्य कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेज को बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। इसके अलावा यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ के तहत भी कॉलेज पंजीकृत नहीं है।

हो रहा जबरदस्त नुकसान

पंजीयन नहीं होने से लॉ कॉलेज जबरदस्त नुकसान में हैं। यह कॉलेज राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और यूजीसी के अन्य योजनाओं में मिलने वाले बजट से महरूम हैं। सरकार से भी कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही। छह वर्ष पूर्व सिर्फ कॉलेज भवन बनाए गए हैं। इनके अलावा लॉ कॉलेज में कोई काम नहीं हो पाया है। यहां स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट मूट कोर्ट, खेल सुविधाएं, कैंटीन, लेक्चर थियेटर, कंप्यूटर लेब, वाहन पार्र्किंग जैसी सुविधाओं का अभाव है।

सब देख रहे तमाशा..
राज्य सरकार, बार कौंसिल ऑफ इंडिया, यूजीसी और विश्वविद्यालय तमाशा देख रहे हैं। लॉ कॉलेज की बदहाली के लिए यह सभी जिम्मेदार हैं। बार कौंसिल से स्थाई मान्यता नहीं होने से विश्वविद्यालय इन कॉलेज को स्थाई सम्बद्धता नहीं दे रहे। स्थाई मान्यता-सम्बद्धता नहीं होने से यूजीसी इन्हें 12 (बी) और 2 एफ के तहत पंजीकृत नहीं कर रहा। सरकार को इन कॉलेज की समस्याओं से कोई वास्ता नहीं है।

यूजीसी के 12 बी-2एफ में पंजीकरण होना जरूरी है। इसके बाद ही रूसा और अन्य योजनाओं में बजट मिल सकता है।
डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज

Published on:
26 Feb 2019 07:20 am