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अजमेर.
तीन दिवसीय बर्ड फेयर सोमवार को शहरवासियों के दिलों पर छाप छोड़ गया। परिन्दों की अद्भुत दुनिया के बीच रहे प्रतिभागियों, विद्यार्थियों और आमजन ने अगले साल फिर मिलने का संकल्प लिया। सिंदूरी शाम और मंद बयार के बीच पक्षियों के कलरव ने मिठास घोली।
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के सामने स्थित पाथ-वे पर आयोजित समापन समारोह में बोलते हुए विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि सुदूर प्रांतों से आए पक्षी प्रकृति के पहरेदार हैं। पक्षी और आनासागर अजमेर एकदूसरे के पूरक हैं। पक्षियों को निहारने और कुदरती नजारे देखना स्वास्थ्यप्रद होता है। यह वास्तव में वल्र्ड फेयर है। राजस्थान पत्रिका ने लोगों को अजमेरवासियों को इनकी महत्ता बताई है। हमें अपनी विरासत, झील, तालाब, पहाड़ को सहेजकर रखना चाहिए। लोगों की भागीदारी से ही शहर स्वच्छ सुंदर और विकसित बन पाएगा। राजस्थान पत्रिका के संपादकीय प्रभारी उपेंद्र शर्मा ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन वर्तिका शर्मा ने किया।
पक्षियों का घरौंदा है आनासागर
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल ने कहा कि तारागढ़-हैप्पी वैली, पुष्कर घाटी की सुंदरता बरसात में देखते ही बनती है। शहर में इतने पक्षियों का आना यहां के खुशनुमा पर्यावरण को दर्शाता है। आनासागर झील तो उनका मनमाफिक घर है। बर्ड फेयर ने अजमेर को एक विशिष्ट पहचान दी है। हमें अपने शहर की प्राचीन विरासत, भवनों की स्थापत्य कला, खान-पान, प्राकृतिक नजारों को चिन्हित कर उन्हें विश्व पटल पर उभारने का प्रयास करना चाहिए।
सोच और नजारे में बदलाव
महापौर धर्मेन्द्र गहलोत ने कहा कि बरसों तक जनप्रतिनिधियों को आनासागर झील में गंदगी, कचरे, दुर्गन्ध की शिकायतें मिलती थी। पत्रिका ने इस सोच और नजारे में बदलाव किया है। बर्ड फेयर ने आनासागर और शहर को जीवन्त बनाने में योगदान दिया है। इससे हमें भी शहर की विरासत और नवाचार की मार्केटिंग का अवसर दिया है। यहां प्रवासी परिन्दों का आना सुखद है। सागर विहार कॉलोनी स्थित नमभूमि तो उनका पसंदीदा घर है। पक्षियों के प्राकृतिकआवास को सुरक्षित किया जाएगा।
प्रकृति को रखें संरक्षित
जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा ने कहा कि प्रवासी पक्षियों को अजमेर में देखना सुखद है। कई शहर तो परिन्दों और प्राकृतिक नजारों से वंचित हैं। अजमेर इस मामले में खुशनसीब है। शहरवासियों और विद्यार्थियों को इस प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखना चाहिए। पशु-पक्षी और हरियाली से ही पृथ्वी पर मौसम, तापमान और पर्यावरण संतुलित रह सकता है।
पक्षी सिखाते हैं सौहार्द
हज कमेटी और दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अमीन पठान ने कहा कि परिन्दे विभिन्न प्रांतों से आते हैं। अजमेर गरीब नवाज और तीर्थ नगरी पुष्कर के वजह से ही पहचाना जाता रहा है। अब बर्ड फेयर इसकी नई पहचान बना है। लोग पक्षियों के संरक्षण और उनकी प्रजातियों पर बातें करने लगे हैं। पक्षी हमें जीवन में सौहार्द और परस्पर प्रेम की सीख देते हैं। हमें इसे अपनाना चाहिए। हमें पक्षियों से संसाधनों का सीमित उपयोग और विकास की संतुलित अवधारणा को सीखना चाहिए।
पक्षी जिले की पहचान
भारतीय वन सेवा के अधिकारी रवि मीना ने कहा कि पक्षी जिले की पहचान हैं। अजमेर में आनासागर, फायसागर के अलावा सरवाड़, जवाजा, किशनगढ़ में भी कई पक्षियों की आवक होती है। हमें पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास बनाए रखने चाहिए। जिला प्रशासन ने शहर को स्वच्छ, सुंदर बनाने की शुरुआत की है। यह तभी संभव होगा जबकि सबके सामूहिक प्रयास होंगे।
पक्षियों से प्रकृति की सुंदरता
शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि पक्षियों से प्रकृति की सुंदरता बढ़ती है। दुर्भाग्य से अब चील, गिद्ध, गौरेया और अन्य पक्षी विलुप्त हो रहे हैं। हमें संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के बजाय संतुलित अवधारणा को विकसित करना चाहिए। शहर भाजपा अध्यक्ष अरविंद यादव ने कहा कि राजस्थान पत्रिका ने बर्ड फेयर के रूप में शहर को बेमिसाल सौगात दी है। हमें आनासागर और अन्य जलाशयों की स्वच्छता, हरियाली और सौंदर्य को बनाए रखना चाहिए। तभी भविष्य में पक्षियों की आवाजाही और बढ़ सकेगी।
यह रहे समारोह में मौजूद
बर्ड कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष महेंद्र विक्रम सिंह, प्रो. प्रवीण माथुर, डॉ. के. के. शर्मा, डॉ. अतुल दुबे, डॉ. सुनील लारा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष सबा खान, नगर निगम उपायुक्त गजेंद्र सिंह रलावता, करतार सिंह, रेंजर सुधीर माथुर, फॉरेस्टर सैयद रब नवाज