पुरस्कार योजना के तहत सीबीएसई से सम्बद्ध सरकारी, निजी और अनुदानित स्कूल आवेदन कर सकेंगे।
अजमेर
सीबीएसई से सम्बद्ध सरकारी और निजी स्कूल को स्वच्छता और हरियाली के आधार पर पुरस्कार मिलेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना प्रारंभ की है। स्कूल से जल्द आवेदन मांगे जाएंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्वच्छता और हरियाली के आधार पर सभी स्कूल को पुरस्कार देने की योजना बनाई है। स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना के तहत सीबीएसई से सम्बद्ध सरकारी, निजी और अनुदानित स्कूल आवेदन कर सकेंगे। इसमें सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल शामिल हो होंगे। स्कूल मोबाइल एप डाउनलोड कर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
इन बिन्दुओं पर रहेगा ध्यान
-स्कूल भवनों में स्वच्छता और कचरा निष्पादन प्रक्रिया
-विद्यार्थियों और स्टाफ के शौचालयों की सफाई
-शुद्ध पेयजल और जल निकासी
-संरक्षण के प्रबंध-परिसर में हरियाली, सौर ऊर्जा की उपयोगिता
-पर्यावरण सुरक्षा और कैंटीन
-छात्रावास में शुद्ध भोजन
कहीं स्थिति अच्छी, कहीं खराब
स्वच्छता के मामले में कई स्कूल बेहतर हैं। इनमें अजमेर सहित अन्य राज्यों के नामचीन पब्लिक स्कूल शामिल हैं। दूसरी ओर कई सरकारी और ग्रामीण स्कूल में हालात बेहतर नहीं है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां पानी की टंकियों और टॉयलेट की सफाई नहीं होती। सीवरेज के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से परिसर और आसपास गंदगी रहती है। दीवारों में सीलन या निकटवर्ती इलाके में कचरा फैला दिखता है। सौर ऊर्जा और पर्यावरण सुरक्षा के मामले में भी स्कूल उदासीन हैं।
यहां निजी संस्थाएं ज्यादा बेहतर
बीते साल क्लीन-ग्रीन कैंपस योजना के तहत देश के कई विश्वविद्यालयों को रेटिंग दी गई थी। निजी संस्थाओं के सामने सरकारी विश्वविद्यालय कहीं नहीं टिक सके। राजस्थान से जयपुर का मणिपाल यूनिवर्सिटी एकमात्र संस्थान रहा जिसे सूची में द्वितीय स्थान मिला। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, असम, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और पंजाब के सरकारी और निजी कॉलेज-विश्वविद्यालय ही शामिल हुए थे।