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प्राध्यापक भर्ती-2022 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी पाने वाला RPSC का UDC गिरफ्तार, 8 लाख में रिकॉर्ड बदलने का सौदा

प्राध्यापक (इतिहास) भर्ती परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी हासिल करने और बाद में रिकॉर्ड में हेरफेर कर सबूत मिटाने की साजिश का खुलासा हुआ है। मामले में एसओजी ने मुख्य आरोपी राजेश कुमार मीणा और आरपीएससी के यूडीसी मान सिंह मीणा को गिरफ्तार किया है।

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अजमेर

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Arvind Rao

May 14, 2026

Lecturer Recruitment 2022

राजेश मीणा और मान सिंह मीणा (पत्रिका फोटो)

जयपुर/अजमेर: राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ जारी अभियान के बीच एसओजी (SOG) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। प्राध्यापक (इतिहास) भर्ती परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी पाने वाले मुख्य आरोपी राजेश कुमार मीणा और इस साजिश में उसका साथ देने वाले आरपीएससी (RPSC) के यूडीसी (UDC) मान सिंह मीणा को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह पूरा मामला न केवल परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठाता है। बल्कि आयोग के भीतर बैठे कर्मचारियों की मिलीभगत को भी उजागर करता है।

जांच के अनुसार, करौली जिले के आरेज गांव निवासी राजेश कुमार मीणा ने साल 2022 की प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में खुद बैठने के बजाय अपने परिचित उम्मेद सिंह को डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा केंद्र भेजा था। शातिर राजेश ने प्रवेश पत्र के साथ कंप्यूटर के जरिए छेड़छाड़ की और उस पर उम्मेद की फोटो लगा दी। इस धोखाधड़ी के दम पर राजेश का चयन हो गया और उसने उदयपुर के अमरापुरा विद्यालय में प्राध्यापक के पद पर कार्यभार भी संभाल लिया।

सबूत मिटाने के लिए RPSC कर्मचारी से सौदा

जब मामले की जांच शुरू हुई, तो राजेश ने सरकारी रिकॉर्ड से डमी अभ्यर्थी के फोटो और हस्ताक्षर जैसे साक्ष्यों को मिटाने की साजिश रची। इसके लिए उसने अजमेर स्थित आरपीएससी कार्यालय में तैनात यूडीसी मान सिंह मीणा से संपर्क साधा।

रिकॉर्ड में हेरफेर करने के बदले मान सिंह ने 8 लाख रुपए की मांग की थी। आरोपी राजेश ने काम शुरू करने के लिए 2 लाख रुपए एडवांस के तौर पर मान सिंह को दिए थे।

SOG की कार्रवाई

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने पिछले साल फरवरी में संदिग्ध दस्तावेजों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि मान सिंह मीणा-आरोपी यूडीसी (निवासी सोप, नादौती) को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।

साथ ही राजेश कुमार मीणा-मुख्य आरोपी, जो लंबे समय से फरार चल रहा था, उसे भी दबोच लिया गया है। कोर्ट ने उसे 18 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

आरोपी राजेश कुमार मीणा वर्तमान में निलंबित चल रहा है। एसओजी अब डमी अभ्यर्थी उम्मेद सिंह की तलाश कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह की सेंधमारी की है।