पुलिस कंकाल का पोस्टमार्टम करवाकर भूल गई लेकिन खोपड़ी से तथ्य हत्या की कहानी बयां कर रहे है।
मनीषकमार सिंह/अजमेर।
अपराधी अपराध को छुपाने की लाख कोशिशें कर लेकिन अपराध नहीं छुपताÓ। श्रीनगर की सतपुड़ी पहाड़ी की तलहटी में एक माह पहले मिले युवक के नर कंकाल मिलने के मामले में हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाया था। शव को जंगली जानवरों ने भी अपना निवाला बनाया। मामले में हालांकि श्रीनगर थाना पुलिस कंकाल का पोस्टमार्टम करवाकर भूल गई लेकिन कंकाल की खोपड़ी से तथ्य हत्या की कहानी बयां कर रहे है।
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की फोरेंसिक मेडिसिन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में धारदार हथियार से हत्या करना सामने आया है। मृतक की खोपड़ी के दाहिनी साइड आंख से कान के बीच धारदार भारी भरकम हथियार से वार किया गया था। धारदार हथियार से कनपटी की हड्डी टूटी हुई। खोपड़ी के ऊपरी हिस्से में भारी वस्तु की चोट है।
खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा टूटने के साथ नीचे खून का थक्का बना हुआ था जो हत्या की ओर इशारा करते है। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम के पन्द्रह दिन बाद भी पुलिस ने मृतक की रिपोर्ट लेना व जानना मुनासिब नहीं समझा। पुलिस नर कंकाल को बीमार व खानाबदोश की भूख से मृत्यु मानते हुए प्रकरण को दफ्तर दाखिल करने के मूड में है।
जंगली जानवरों का बना निवाला
शव को जंगल मे जंगली जानवरों ने भी निवाला बनाया लेकिन दुर्गंध के बाद बाकी कंकाल सुरक्षित बच गया। कंकाल में पुलिस को एक पैर और हाथ की हड्डी नहीं मिली जबकि मेडिकल बोर्ड के मुताबिक मृतक की उम्र 40 से 50 के बीच रही होगी। शव बरामदगी से करीब डेढ़ से दो माह पहले फेंका गया था।
दुर्गंध से पहुंचे चरवाहे
जंगल में मानव कंकाल की दुर्गंध दूर तक फैलने पर चरवाहे पहुंचे थे। चरवाहे की सूचना पर श्रीनगर के वनपाल हेमराज वैष्णव, मुकेश मिश्रा, मोहनसिंह व उगमराज गुर्जर सतपुड़ी पहाड़ी की गाल में पहुंचकर देखा तो जहां क्षत-विक्षत कंकाल मिला। उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
खून मिला न हथियार
पुलिस को कंकाल के पास तहमद-टी शर्ट व जूते मिले थे लेकिन दो माह बाद भी उनसे मृतक की पहचान नहीं कर सकी। पुलिस को वहां न तो खून मिला न ही हथियार सहित अन्य कोई साक्ष्य, जिससे यह साबित होता है कि हत्या के बाद शव को दुर्गम पहाडिय़ों में फेंका गया था।