मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में मिलावटखोरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने के साथ कठोर कार्रवाई करने का संकेत देते हुए कहा कि मिलावटखोरों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
अजमेर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने राज्य में मिलावटखोरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने के साथ कठोर कार्रवाई करने का संकेत देते हुए कहा कि मिलावटखोरों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
गहलोत ने सोमवार को अजमेर (Ajmer) के आजाद पार्क में आयोजित जनसभा में जनसाधारण के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार पूरी तैयारी के साथ मिलावटखोरी के खिलाफ 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान शुरु करेगी।
उन्होंने मिलावटखोरों को कठोर सजा दिए जाने की वकालत करते हुए कहा -'मिलावटखोरों को फांसी की सजा होनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि वर्तमान में भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है। बढ़ती जनसंख्या के चलते सरकार जल्द ही 'जनता क्लिनिक' शुरु करने जा रही है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवा है। तीन बार मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कभी भी इसमें कमी नहीं रखी और नि:शुल्क दवाइयों की योजना का लाभ राज्य की जनता को ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी इसका लाभ मिला। सरकार की मुफ्त दवा योजना की सौगात की तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की है। जिसके कारण देश के अनेक राज्यों में राजस्थान निशुल्क दवा वितरण का संदेश पूरे देश में गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि राज्य के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खुले। इससे पहले आजाद पार्क से ही मुख्यमंत्री गहलोत ने साढ़े छह करोड़ रुपए की लागत से बने पंचशील स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा लोहागल ग्राम स्थित चार करोड़ से ज्यादा लागत वाले राजकीय आचार्य संस्कृत कॉलेज के भवन का रिमोट कंट्रोल के जरिए लोकार्पण किया। इस मौके पर डॉ. रघु शर्मा, मास्टर भंवरलाल मेघवाल, प्रभारी प्रमोद जैन भाया भी उपस्थित रहे।