अजमेर

अर्थी को नदी के पांच फीट गहरे पानी से पार कर ले जाना पड़ता है श्मशान घाट

आठ साल पहले डाई नदी की पुलिया टूटी थी जो आज तक नहीं बनी, बारिश के समय ग्रामीणों की आवाजाही रहती बंद, श्मशान घाट नदी के दूसरी छोर होने से शव को गहरे पानी से लेजाना मजबूरी
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Nov 05, 2019
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डाई नदी के पांच फीट गहरे पानी से अर्थी को ले जाते ग्रामीण

अजमेर. किसी की मौत के बाद अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी आए तो चिंता (tension) का विषय है। एक ओर मृतक के परिवार में शोक रहता है। दूसरी ओर समाज के लोग सांत्वना देते हैं। शव (death body) के अंतिम संस्कार में आमतौर पर परेशानी की शिकायतें कम ही सुनने को मिलती है, लेकिन अजमेर (ajmer) जिले की ग्राम पंचायत लसाडिय़ा के मजरा रंगीली का झोपड़ा में शवयात्रा को नदी के गहरे पानी (deep water) से होकर गुजरना पड़ रहा है।

अर्थी को कंधे पर रखकर लोग नदी के पांच फीट (five feet) गहरे पानी से निकल कर दूसरे छोर पर ले जाने को मजबूर हैं। बारिश (rain) के समय तो यह समस्या (problam) और भी बढ़ जाती है, क्योंकि नदी के पानी का बहाव तेज होता है। ऐसे में कई बार नदी का पानी कम होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। तब जाकर शव (death body) को पंचतत्व में विलीन करना होता है।

किसी ने नहीं ली सुध

उल्लेखनीय है कि डाई नदी की पुलिया आठ साल (eight year) पहले टूट गई थी। इसकी मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने सांसद, विधायक, पंचायत समिति प्रधान व जिला कलक्टर तक को लिखा, लेकिन आज दिन तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई।

रंगीली का झोपड़ा निवासी नंदलाल सैनी का सोमवार रात निधन हो गया था। मंगलवार को परिजन व समाज के लोग अर्थी लेकर डाई नदी के दूसरी छोर पर पहुंचे। इस दौरान नदी के पानी की गहराई पांच फीट (deep five feet) थी।

अर्थी को कंधा देने वाले मुश्किल से नदी पार कर श्मशान घाट पहुंचे। लसाडिय़ा पंचायत क्षेत्र के कई परिवार खेती करने एवं मवेशी चराने के लिए डाई नदी के उस पार नया मजरा रंगीली का झोपड़ा में निवास कर रहे हैं। वहां श्मशान घाट नहीं होने से लसाडिय़ा गांव समीप स्थित श्मशान आना पड़ता है।

दीवार के सहारे करते नदी पार

पुलिया की एक तरफ की दीवार के सहारे लोग नदी पार कर दूसरी तरफ पहुंचते हैं। इस दौरान जोखिम बना रहता है। दीवार पार करते समय कई बुजुर्ग गिरकर घायल हो चुके हैं। बारिश के बाद नदी में पानी कम होने पर ग्रामीण अपने स्तर पर मिट्टी डालकर अस्थायी तौर पर रास्ता बना लेते हैं। इस बार अतिवृष्टि ( heavy rain) के चलते नदी में करीब चार से पांच फीट पानी भरा हुआ है।

रात्रि चौपाल में भी उठाया था मुद्दा

ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन व विभाग को कई बार अवगत कराया गया,लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। पुलिया के अभाव में खेतों में आना-जाना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में ग्राम पंचायत लसाडिय़ा मुख्यालय पर आयोजित चौपाल में जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरारी लाल वर्मा एवं केकड़ी के उपखंड अधिकारी व सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आए थे। तब भी पुलिया का मुद्दा उठाया गया,लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

Published on:
05 Nov 2019 09:43 pm