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Jagan Gurjar Murder Case: और राज उगलेगा विष्णु सिंह, राजस्थान पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर किया अरेस्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कुख्यात जगन गुर्जर हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई। अजमेर जेल में मर्डर करने वाले आरोपी विष्णु जाट को पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया।
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Jagan Gurjar Murder Case Accused Vishnu Jat Arrested Production Warrant

Jagan Gurjar Murder Case Accused Vishnu

Ajmer की High Security Jail में बंद धौलपुर के कुख्यात पूर्व डकैत जगन गुर्जर की बैरक के अंदर हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस बहुचर्चित हत्याकांड के मुख्य आरोपी विष्णु सिंह जाट को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से प्रोडक्शन वारंट पर आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। धौलपुर और राजस्थान के अन्य सीमावर्ती जिलों में इस मामले को लेकर फैले भारी तनाव को देखते हुए पुलिस की एक स्पेशल टीम कड़े सुरक्षा पहरे के बीच आरोपी विष्णु को एक अभेद्य बख्तरबंद गाड़ी में डालकर जेल से थाने लेकर पहुंची। इस गिरफ्तारी के बाद अब चंबल के बीहड़ों से लेकर जेल प्रशासन के भीतर रची गई इस खूनी साजिश के कई बड़े और चौंकाने वाले राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बख्तरबंद गाड़ी में लाया गया आरोपी

शुक्रवार सुबह जब सिविल लाइन थाना पुलिस विष्णु सिंह को लेने हाई सिक्योरिटी जेल पहुंची, तो सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी। आरोपी को लाने के लिए विशेष तौर पर बख्तरबंद गाड़ी का इस्तेमाल किया गया ताकि रास्ते में किसी गैंगवार या हमले की आशंका को टाला जा सके।

इस पूरी कार्रवाई के दौरान वृताधिकारी शिवम जोशी, सिविल लाइन थाना प्रभारी शंभू सिंह शेखावत और उप निरीक्षक गिरिराज शर्मा समेत बहुत बड़ी संख्या में हथियारों से लैस पुलिस जाप्ता मुस्तैद रहा।

खुलेंगे गैंगवार और साजिश के राज!

सिविल लाइन थाना पुलिस अब आरोपी विष्णु जाट को कोर्ट में पेश करके उसकी कड़े पहरे में पुलिस रिमांड हासिल करेगी। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपी से उन मूल कारणों का पता लगाया जाएगा जिसकी वजह से उसने इस हत्या को अंजाम दिया। क्या इस जेल मर्डर के पीछे राजस्थान के किसी बाहरी बड़े गैंग का हाथ है, या फिर यह पूरी घटना जेल कर्मियों की संभावित लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा थी, इन सभी पहलुओं को लेकर एक विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी गई है।

तौलिए और गमछे से घोंटा था गला

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 June 2026 को हुई थी जब अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर Jagan Gurjar का शव मिला था। जांच में सामने आया कि भरतपुर के बहुचर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के मुख्य आरोपी विष्णु जाट ने जेल की बैरक के भीतर मामूली कहासुनी के बाद या पुरानी रंजिश के चलते Jagan Gurjar की तौलिए और गमछे से गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से ही राजस्थान के कानून व्यवस्था और खासकर धौलपुर क्षेत्र के गुर्जर बाहुल्य गांवों में भारी आक्रोश और प्रशासनिक हलचल देखी जा रही है।

मर्डर को सुसाइड का रूप देने की कोशिश

पुलिस के अनुसार, आरोपी विष्णु जाट केवल हत्या करके ही नहीं रुका, बल्कि उसने इस पूरे मर्डर मिस्ट्री को एक आम आत्महत्या का रूप देने की बेहद शातिराना कोशिश की थी। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद उसने Jagan Gurjar के शव को बैरक के भीतर लगे लगभग 13 फीट ऊंचे छत के पंखे से उसी गमछे के सहारे लटकाने का प्रयास किया था ताकि जेल प्रशासन और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को लगे कि जगन ने खुद फांसी लगाई है। हालांकि, मौके के हालात और शरीर के निशानों ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।

सीसीटीवी कैमरे पर टूथपेस्ट, सबूत मिटाने की कोशिश

विष्णु जाट की इस सोची-समझी साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह था कि उसे जेल के भीतर लगे कैमरों की लोकेशन का पूरा अंदाजा था। अपनी इस खूनी करतूत को कैमरे में रिकॉर्ड होने से बचाने के लिए और कानूनी सबूत मिटाने के इरादे से आरोपी ने वारदात से ठीक पहले जेल की बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा दिया था। इस चालाकी के कारण घटना के वक्त की कोई भी लाइव रिकॉर्डिंग कैमरे में दर्ज नहीं हो पाई, जिसने शुरुआत में जेल अधिकारियों को भी उलझा दिया था।

जगन तक कैसे पहुंचा विष्णु? सुरक्षा पर बड़े सवाल

इस पूरे हत्याकांड ने अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के सुरक्षा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। नियमों के मुताबिक दोनों बेहद संवेदनशील कैदी थे और जेल प्रशासन द्वारा विष्णु जाट और Jagan Gurjar को बिल्कुल अलग-अलग बैरक और सेल अलॉट की गई थीं। इसके बावजूद विष्णु जाट इतनी आसानी से अपनी सेल से निकलकर Jagan Gurjar की बैरक तक कैसे पहुंच गया, यह सबसे बड़ा और रहस्यमयी सवाल बना हुआ है। इस लापरवाही को लेकर जेल प्रबंधन, प्रहरियों और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं और परिजनों की शिकायत पर जेल प्रशासन के खिलाफ हत्या की एफआईआर (FIR) भी पहले ही दर्ज हो चुकी है।