
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
वन विभाग इस बार जून में सालाना वन्य जीव गणना कराएगा। कोरोना लॉकडाउन के चलते विभाग ने वैशाख पूर्णिमा यानि 7 मई को गणना नहीं कराने का फैसला किया है।
वन विभाग प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा पर अजमेर, किशनगढ़, टॉडगढ़, जवाजा ब्यावर, शोकलिया, पुष्कर और अन्य क्षेत्रों में वन्य जीव की गणना करता है। इनमें पैंथर, सियार, लोमड़ी, साही, हिरण, खरगोश, अजगर, बारासिंगा और अन्य वन्य जीव शामिल होते हैं। वन्य जीव की गणना के लिए वनकर्मी विभिन्न क्षेत्रों में मचान बांधकर वन्य जीव की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इस बार भी 7 मई को वैशाख पूर्णिमा पर गणना प्रस्तावित थी।
अब 5-6 जून को गणना
उप मंडल वन संरक्षक सुदीप कौर ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के चलते वन्य जीव गणना 7 मई को मुश्किल है। लिहाजा विभाग ने 5 और 6 जून को गणना कराने का फैसला किया है। वन्य जीव गणना अजमेर मंडल के विभिन्न वाटर हॉल पर की जाएगी।
यह थी पिछड़ा गणना की स्थिति
नीलगाय (रोझड़ा)-3 हजार, लंगूर-1 हजार , पैंगोलिन नेवला-200, जंगली सूअर-100, मोर-3 हजार, सियार-गीदड़-450। पिछले साल राजगढ़ इलाके में शावक के साथ मादा पैंथर भी दिखाई दी थी। जिले में बाघ, चिंकारा, चीतल, सारस, मछुआरा बिल्ली, गिद्ध, उडऩ गिलहरी, काला हरिण, जंगली मुर्गा, चौसिंगा विलुप्त हो चुके हैं।
गोडावण हुए नदारद
जिले के शोकलिया वन्य क्षेत्र से गोडावण नदारद हो चुके हैं। पिछले कई साल से वन विभाग को यहां गोडावण नहीं मिले हैं। 2001 की गणना में यहां 33 गोडावण थे। 2002 में 52, 2004 में 32 गोडावण मिले। इसके बाद यह सिलसिला घटता चला गया। पिछले पांच साल में यहां एक भी गोडावण नहीं मिले हैं।
ऑनलाइन पढ़ाई के साथ कर रहे योग-व्यायाम
अजमेर. कोरोना संक्रमण और इसके बाद देश-दुनिया में बदलाव आने तय हैं। आने वाले वक्त में प्रत्येक क्षेत्र में तब्दीली होगी। लॉकडाउन के दौरान भी लोगों ने खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालना शुरू कर दिया है। खासतौर पर शिक्षा जगत में सर्वाधिक नवाचार दिख रहे हैं। रहे हैं। पत्रिका लॉकडाउन सीरीज में ऑल सेंट्स सीनियर सेकंडरी स्कूल के निदेशक पियूष कुमार ने कुछ यूं विचार साझा किए।