अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह 44 दस्तावेज व 13 आर्टिकल पेश किए।
अजमेर
अपर जिला न्यायाधीश संख्या चार सुरेन्द्र कुमार ने जमीन के विवाद को लेकर जानलेवा हमले के चार अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए सात वर्ष का कारावास व 1.24 लाख रुपए जुर्माने से दंडित किया। अदालत ने मामले में दो अभियुक्तों को बरी कर दिया। पीडि़त प्रतिकर स्कीम के तहत घायल हुए लोगों को जुर्माना राशि में से एक लाख रुपए बतौर मुआवजा भी दिलाए जाने के आदेश अदालत ने दिए।
प्रकरण के तथ्य
परिवादी मसीनिया निवासी गिरधारी भांबी ने 30 दिसम्बर 2012 को जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में पर्चा बयान के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि वह अपने खेत पर पिता मोती व पुखराज के साथ बाड़ लगाने का कार्य कर रहे थे। इस दौरान भावता के रास्ते पर आरोपित धर्मा, लादू, भंवरलाल, शिवजी, सीताराम, छोटी ने एक राय होकर कुल्हाड़ी व बरछी लेकर पहुंचे और उनके भाई सांवरा का खेत खाली करने की धमकी दी।
इस बात पर हुई कहा सुनी मारपीट में बदल गई। आरोपितों ने परिवादी के पिता पुखराज पर लाठी, बरछी से हमला कर दिया इस बीच परिवादी ने पुखराज का बीच बचाव किया तो उसके भी चोटें आई। आसपास के लोगों की मदद से किसी तरह परिवादी ने पुखराज को छुड़ाया।
विवाद का कारण जमीनी रंजिश है। पीसांगन पुलिस ने मारपीट, षडयंत्र व जानलेवा हमले के आरोप में मामला दर्ज कर चालान पेश किया। अदालत में सरकारी वकील जीतमल प्रजापति ने अभियोजन पक्ष की ओर से 13
गवाह 44 दस्तावेज व 13 आर्टिकल पेश किए।
इन धाराओं में सुनाई सजा आरोपित मसीनिया (पीसांगन) धर्मा, लादू भंवरलाल व सीताराम को धारा 323/34 व 324/34 में एक वर्ष व प्रत्येक पर 1000 रुपए जुर्माना, धारा 341 के तहत एक माह व 100 रुपए जुर्माना, धारा 325 के तहत 3 साल व पांच हजार रुपए, धारा 326 के तहत 5 साल 10 हजार रुपए तथा धारा 307 के तहत प्रत्येक अभियुक्त को 7-7 साल का कारावास व 15-15 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। इसी मामले के आरोपित छोटी व शिवराज को अदालत ने बरी कर दिया।
पीडि़त को दिलाया मुआवजा
अदालत ने पीडि़त प्रतिकर स्कीम के तहत हमले में आहत हुए पुखराज को जुर्माने की राशि में से एक लाख रुपए बतौर मुआवजा दिलाने के लिए भी पृथक से आदेश जारी किए।