
अजमेर के परबतपुरा स्थित रेलवे फाटक के पास आरयूबी के लिए रखे गए ब्लॉक। फोटो पत्रिका
अAjmer Rail Project : जमेर। जिले में रेल परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों, ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। परबतपुरा में आरयूबी, यार्ड निर्माण, मालियान थर्ड, बड़गांव, खाजपुरा व हटूंडी क्षेत्र में रेलवे यार्ड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच किसानों ने संशोधित अधिसूचना के अनुसार मुआवजा देने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि शहरी परिधि क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि का मूल्यांकन आवासीय भूमि की दरों पर होना चाहिए, ताकि उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सके।
अजमेर-चित्तौड़गढ़ रेल मार्ग के लिए रेलवे के द्वितीय चरण के कार्यों के लिए हटूंडी, खाजपुरा और बड़गांव में यार्ड निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है। वहीं परबतपुरा बायपास पर रेलवे अंडरब्रिज निर्माण के दौरान गैस पाइपलाइन बाधा बनने पर डिजाइन में बदलाव किया गया है। इसके चलते अब खातेदारी भूमि की अतिरिक्त आवश्यकता सामने आई है। इसके अलावा परबतपुरा क्षेत्र में यार्ड विस्तार तथा मालियान थर्ड में नए यार्ड निर्माण के लिए भी किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है।
किसानों ने अधिसूचना में शामिल उस प्रावधान का उल्लेख किया है, जिसमें शहरी क्षेत्र की सीमा में 40 फीट से अधिक चौड़ाई वाली सड़कों पर स्थित गैर-कृषि भूमि की दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि का प्रावधान किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई प्रभावित भूमि खंड प्रमुख मार्गों और विकसित क्षेत्रों के निकट स्थित है, इसलिए उनके मूल्यांकन में इन प्रावधानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
किसानों की सबसे बड़ी आपत्ति मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री वर्गगज के आधार पर होती है, लेकिन अधिग्रहण के समय मुआवजा बीघा के हिसाब से निर्धारित किया जाता है। इससे वास्तविक बाजार मूल्य और मुआवजे में बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। सरकार जिस भूमि का अधिग्रहण करती है, उसका मूल्यांकन उसी आधार पर होना चाहिए जिस आधार पर बाजार में उसका लेन-देन होता है। रेल परियोजना से प्रभावित प्रमुख गांवों में-मालियान थर्ड, परबतपुरा, बड़गांव, खाजपुरा, हदंडी, लच्छीपुरा शामिल हैं। इन क्षेत्रों के किसानों ने मुआवजा निर्धारण से पहले संशोधित अधिसूचना के प्रावधानों को लागू करने की मांग की है।
अधिगृहण से प्रभावित किसानों का कहना है कि राजस्थान सरकार के वित्त विभाग द्वारा एक अक्टूबर 2025 को संशोधित अधिसूचना में शहरी क्षेत्र, शहरीकरण योग्य सीमा और परिधि पट्टी (पेरिफेरी) में स्थित 2000 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि का मूल्यांकन संबंधित क्षेत्र की आवासीय भूमि के बराबर निर्धारित किया गया है।
किसानों का तर्क है कि जिन गांवों की भूमि शहरी विस्तार की जद में आ चुकी है, वहां अधिग्रहण के दौरान भी यह प्रावधान को लागू किया जाना चाहिए। जबकि वर्तमान में कृषि भूमि मानकर कम दरों पर मुआवजा तय किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में इन क्षेत्रों का भूमि मूल्य आवासीय और व्यावसायिक संभावनाओं के कारण काफी अधिक है।
सेंदरिया ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच घनश्याम जांगिड़ ने बताया कि सरकार भूमि अधिग्रहण के समय करीब 8 लाख रुपए प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा देती है, जो वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है। जब जमीन की रजिस्ट्री वर्गगज में है तो अधिग्रहण का मुआवजा भी वर्गगज में दिया जाना चाहिए। राज्य सरकार ही भूमि आवाप्ति अधिकारी है और रेलवे परियोजना के लिए भी भूमि का मूल्यांकन एवं अधिग्रहण वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
जिला परिषद सदस्य श्रवण सिंह रावत ने बताया कि भूमि की अवाप्ति बीघा के हिसाब के बजाए वर्तमान बाजार मूल्य से वर्गगज में किया जाना चाहिए। ताकि किसान व जमीन मालिक को उचित मुआवजा मिल सके। जिला प्रशासन को वित्त विभाग की संसोधित अधिसूचना के अनुसार अधिगृहण करना चाहिए।
Updated on:
09 Jun 2026 04:04 pm
Published on:
09 Jun 2026 03:58 pm
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