अजमेर

पोक्सो आरोपित पर यूं बरसी पुलिस की मेहरबानी, नहीं किया निर्धारित समय में चालान पेश आरोपित को मिली जमानत

पुलिस अनुसुधान में ढिलाई का एक नमूना फिर सामने आया है। निर्धारित तीन माह की अवधि में अनुसंधान पूरा नहीं करने व चालान पेश नही कर पाने का फायदा
2 min read
Jun 06, 2018
court announced bail to posco accused because of this reason
पोक्सो आरोपित पर यूं बरसी पुलिस की मेहरबानी, नहीं किया निर्धारित समय में चालान पेश आरोपित को मिली जमानत

अजमेर . पुलिस अनुसुधान में ढिलाई का एक नमूना फिर सामने आया है। निर्धारित तीन माह की अवधि में अनुसंधान पूरा नहीं करने व चालान पेश नही कर पाने का फायदा पोक्सो (नाबालिग से दुराचार) कानून के आरोपित को मिल गया। अदालत आरोपित को जमानत का लाभ देना पड़ गया। मामले में अदालत ने पुलिस महानिदेशक को अद्र्धशासकीय पत्र लिखकर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दो माह में अदालत को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। मामले में अनुसंधान अधिकारी नसीराबाद सिटी के उपअधीक्षक मोटाराम बेनीवाल हैं। बेनीवाल पर पहले भी एक मामले में थाने पर ही आरोपित की जमानत लेने के बाद अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इनसे स्पष्टीकरण मांगा था।

मामला नसीराबाद सिटी थाने का है। प्रकरण में नाबालिग लड़की से दुराचार के आरोपित मोहम्मद शहजादको 4 मार्च 2018 को गिरफ्तार 5 मार्च को उसे रिमांड के लिए पेश किया गया। इसके बाद 5 जून 2018 तक पुलिस आरोपित के खिलाफ अनुसंधान पूर्ण नहीं कर सकी जिससे अदालत में चालान पेश नहीं किया जा सका। आरोपित शहजाद को अदालत ने 50 -50 हजार की दो जमानतों व इतनी ही राशि के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए।

अदालत की तल्ख टिप्पणी

एससी/ एसटी न्यायालय की न्यायाधीश ब्रज माधुरी शर्मा ने पुलिस अनुसंधान पर तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों की गलती व लापरवाही के कारण पोक्सो जैसे गंभीर प्रकृति के मुकदमे में जमानत मिल गई। ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी पोक्सो में हो रहे अपराधों के प्रति जिम्मेदार व संवेदनशील नहीं है। यह भी संभव है कि मुल्जिम को लाभ देने के उद्देश्य चालान पेश नहीं किया गया हो।

केस डायरी के अवलोकन से स्पष्ट है कि 15 मार्च 2018 को केस डायरी बंद कर दी गई। केस डायरी के अंतिम पृष्ठ पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर व अदालत की मुहर लगाई है। केस डायरी के अंतिम पृष्ठ की फोटो कॉपी रिमांड पेपर के साथ अदालत की पत्रावली में संलग्न की गई है। अदालत ने आदेश में यह भी लिखा कि पुलिस अंतिम दिन 90 वें दिन अदालत में चालान लेकर उपस्थित होती है जिसमें कई कमियां होती हंै। यहां तक कि अधिकारियों को कार्रवाईयों की तिथियों का ज्ञान तक नहीं होता। मामले में अनुसंधान अधिकारी मोटाराम बेनीवाल हंै। थाना प्रभारी सतपाल हैं।

Published on:
06 Jun 2018 06:00 am