अजमेर. सिविल न्यायाधीश (पश्चिम) मनमोहन चंदेल की अदालत ने नगर निगम आयुक्त देशलदान को सोमवार को व्यक्तिश: हाजिर होने के आदेश दिए हैं। नगर निगम ने 7 नवम्बर को प्रार्थी के भवन को उस वक्त सीज कर दिया जबकि प्रकरण की सुनवाई अदालत में लंबित थी। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए आदेशिका में लिखा […]
अजमेर. सिविल न्यायाधीश (पश्चिम) मनमोहन चंदेल की अदालत ने नगर निगम आयुक्त देशलदान को सोमवार को व्यक्तिश: हाजिर होने के आदेश दिए हैं। नगर निगम ने 7 नवम्बर को प्रार्थी के भवन को उस वक्त सीज कर दिया जबकि प्रकरण की सुनवाई अदालत में लंबित थी। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए आदेशिका में लिखा कि निगम का कृत्य इस ओर इशारा करता है कि वह स्वयं को अदालत से उपर समझता है। अदालत ने गुणावगुण पर टिप्पणी किए बिना निगम आयुक्त को सोमवार को अदालत में व्यक्तिश: उपिस्थत होने के आदेश दिए हैं। यह भी लिखा है कि बिना किसी ठोस कारण के हाजिरी से मुक्ति नहीं दी जाएगी।
प्रार्थी इखलाक अहमद की ओर से अदालत में दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की जा रही थी। निगम के वकील अदालत में उपिस्थत हुए। निगम के वकील राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को अवगत कराया कि सभी अधिकारी सुबह से ही सीजिंग की कार्रवाई में गए हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से उपिस्थत नहीं हो पाए हैं। लेकिन भवन को सीज करना निगम के वकील ने स्वीकार किया। अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि निगम को प्रकरण अदालत में लंबित होने की जानकारी होने के बावजूद इस प्रकार की कार्रवाई की। गौरतलब है कि निगम की ओर से गत दिनों की गई सीजिंग की कार्रवाई में गंज िस्थत इखलाक की बहुमंजिला इमारत को सीज कर दिया था।