– अदालत ने 50 हजार रुपए का हर्जाना लगाया – एक माह में राशि विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के आदेश अजमेर. अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो मनमोहन चंदेल ने रिश्वत मांगने के प्रकरण में एसओजी की निलंबित एएसपी दिव्या मित्तल की ओर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दायर परिवाद को 50 हजार […]
- अदालत ने 50 हजार रुपए का हर्जाना लगाया
- एक माह में राशि विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के आदेश
अजमेर. अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो मनमोहन चंदेल ने रिश्वत मांगने के प्रकरण में एसओजी की निलंबित एएसपी दिव्या मित्तल की ओर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दायर परिवाद को 50 हजार रुपए के (कॉस्ट) हर्जाने पर खारिज कर दिया। हर्जाने की राशि एक माह में विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करानी होगी।
अदालत में बयान देने ही नहीं आई
मामले के अनुसार परिवादी की ओर से गेगल थाने को प्रेषित शिकायत पर जांच के लिए वह स्वयं मौजूद नहीं हुई। परिवाद 4 मई को 2023 को प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालत ने 12 मई को परिवादिया के 200 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज करवाने के आदेश दिए। इसके आठ माह बाद तक वह बयान दर्ज करवाने नहीं आई और समय मांगती रही।
सख्ती बरतना न्यायोचित
अदालत ने आदेश में लिखा कि इससे अदालत का कीमती समय खर्च हुआ। इस प्रकार के प्रकरणों में सख्ती बरतना न्यायोचित है अन्यथा प्रत्येक लोक सेवक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उसके खिलाफ मामले में साक्षियों पर दबाव बनाने के लिए ऐसी प्रक्रिया अपना सकता है। इससे साक्षियों के मन में भय व्याप्त होगा। वह स्वतंत्रत एवं निर्भीक रूप से अपनी भूमिका नहीं निभा पाएंगे।
यह था परिवाद
दिव्या मित्तल ने परिवाद दायर किया था। इसमें हेडकांस्टेबल एसओजी सुमेरसिंह, हेडकांस्टेबल बहादुर सिंह, थाना क्रिश्चियन गंज, आगरा निवासी विकास अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, ज्वालापुर हरिद्वार निवासी शेरखान को आरोपी बनाया। इन पर उसकी जान लेने की नीयत से साजिश रचने व राजकार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए । परिवाद में बताया कि विकास, विनोद नशीली दवाओं की तस्करी में लिप्त थे। यह परिवादिया से गैर कानूनी मदद चाहते थे। उन पर उसने कार्यालय पत्रावलियों की जानकारी व लैपटॉप में छेड़छाड़ व दस्तावेज गायब करने जैसे आरोप भी लगाए। यह परिवाद अदालत ने सोमवार को खारिज कर दिया।
रिश्वत प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन
परिवादिया दिव्या मित्त्ल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत रामगंज व अलवर गेट थाने में दर्ज प्रकरण में अनुसंधान किए जा रहे हैं। कर्तव्यों के निर्वहन में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए मध्यस्थ सुमित व अन्य के जरिए एक करोड रुपए की रिश्वत राशि कि मांग करने पर उसके खिलाफ 14 जनवरी 2023 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रकरण पंजीबद्ध किया। इसके बाद 16 मार्च 2023 को संबधित न्यायालय में चालान पेश किया। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।