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Ajmer: काजीपुरा में जल्द गूंजेगी लेपर्ड की दहाड़, 20 करोड़ से बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट

Ajmer Leopard Safari: काजीपुरा में अजमेर संभाग की पहली लेपर्ड सफारी तैयार हो रही है। लोहे की फेंसिंग, टिकट विंडो, चौकी सहित चारदीवारी का 80 प्रतिशत काम हो चुका है। जल्द यहां जिप्सी चलाने की योजना है। इससे पर्यटकों को सैर-सपाटे का मौका मिलेगा।

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Kajipura Leopard Safari, Ajmer

काजीपुरा में गूंजेगी लेपर्ड की दहाड़,पत्रिका फोटो

Ajmer Leopard Safari: काजीपुरा में अजमेर संभाग की पहली लेपर्ड सफारी तैयार हो रही है। लोहे की फेंसिंग, टिकट विंडो, चौकी सहित चारदीवारी का 80 प्रतिशत काम हो चुका है। जल्द यहां जिप्सी चलाने की योजना है। इससे पर्यटकों को सैर-सपाटे का मौका मिलेगा। राज्य सरकार की बजट घोषणा अनुसार विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बीते वर्ष सितम्बर में इसका शिलान्यास किया था।
वन विभाग की अगुवाई में पहले चरण में 5.5 करोड़ रुपए से कार्य प्रारंभ हो चुका है। इससे 24 किलोमीटर क्षेत्र में ईको टूरिज्म बढ़ेगा। प्रे-बेस के लिए 1.50 करोड़ और सफारी के लिए 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जल्द ही वन्यजीव सफारी में लेपर्ड का दीदार कर सकेंगे।

यह हो रहे हैं निर्माण

लेपर्ड सफारी में चारदीवारी, टिकट विंडो, चौकी, वॉच टावर का काम जारी है। पानी के लिए पॉन्ड बनेंगे। सफारी प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए भविष्य में 100 करोड़ तक खर्च होने की उम्मीद है। सफारी में लेपर्ड के अलावा अन्य वन्यजीवों को भी लाने की सरकार की योजना है। अजमेर संभाग में लेपर्ड सफारी बनने पर नायाब पर्यटक स्थल बन सकेगा।

सफारी में छोड़ेंगे पशु

योजनानुसार भैरव मंदिर के पीछे हरी-घास लगाई जाएगी। इसमें विभिन्न प्रजातियों के पशु छोड़े जाएंगे। इससे लेपर्ड भोजन के लिए शिकार कर सकेंगे। मौजूदा वक्त काजीपुरा इलाके में 15 से 20 लेपर्ड का मूवमेंट बना हुआ है। लेपर्ड को शहरी आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए फेंसिंग लगाने का काम भी किया जाएगा। सफारी तैयार होने बाद संभाग में लेपर्ड का स्थायी और सुरक्षित ठिकाना बन जाएगा।

यों बढ़ेगा पर्यटन

लेपर्ड सफारी तैयार होने के बाद पर्यटकों को ओपन जिप्सी में भ्रमण की सुविधा मिलेगी। वहीं सफारी में टूरिस्ट गाइड और विशेषज्ञों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा वन क्षेत्र में रिसर्च स्कॉलर्स शोध कर सकेंगे। संभाग की पहले सफारी में देश-विदेश से पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ने की उम्मीद है। प्रदेश के ​विद्यार्थी भी जैव विविधिता समझ सकेंगे। सफारी तैयार होने के बाद अरावली-नागपहाड़ क्षेत्र में लेपर्ड के संरक्षण में बड़ी मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी मदद मिलेगी।

लुप्त प्राय: श्रेणी में लेपर्ड

लेपर्ड या तेंदुए को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत श्रेणी-प्रथम में शामिल किया गया है। यह लुप्त प्राय: श्रेणी में शामिल है। राज्य में इनकी संख्या 750 से 850 के बीच है। अजमेर जिले में पुष्कर, कोटड़ा-नाग पहाड़, तारागढ़ की पहाड़ियों, बड़ल्या, ब्यावर जिले में टॉडगढ़, जवाजा और अन्य स्थानों तेंदुए-लेपर्ड का मूवमेंट रहता है।