अजमेर

दिल्ली के युवकों ने अजमेर के बिजनेसमैन से की ठगी, 1 साल पहले बनाया था गिरोह, अब 4 आरोपी गिरफ्तार

अजमेर में पॉलिसी रिन्यू कराने के नाम पर बिजनेसमैन से ₹6.50 लाख की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने दिल्ली से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
2 min read
Aug 22, 2026
ajmer cyber crime
गिरफ्तार आरोपियों की फोटो: पत्रिका

Cyber Fraud From Ajmer Businessman: पॉलिसी रिन्यू करने के नाम पर व्यापारी से ठगी के मामले में चार आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। ठग 10 प्रतिशत कमीशन रखकर रुपए ट्रांसफर करते थे। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। साइबर थाना के हेड कॉन्स्टेबल महिपाल चारण ने बताया कि बीती 23 जुलाई को आनासागर लिंक रोड निवासी बिजनेसमैन राजकुमार हेड़ा ने साइबर थाने में रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि पॉलिसी मैच्योर होने के बाद उसे रिन्यू करने के नाम पर कुछ लोगों ने संपर्क किया। उन्होंने अलग-अलग प्रक्रिया बताते हुए 6 लाख 50 हजार रुपए ठग लिए। इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत देने के अलावा साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

दिल्ली निवासी आरोपियों ने एक साल पहले गिरोह बनाया था। उन्होंने अजमेर में पॉलिसी रिन्यू करने के नाम पर बिजनेसमैन से ठगी की। गिरोह में शामिल एक युवक के खाते में ठगी के रुपए आते थे। इसके बदले उसे एक दिन का 500 रुपए मिलता था। इसके बाद मुख्य आरोपी अपने हिस्से का 10 प्रतिशत कमीशन निकालकर रुपए को आगे ट्रांसफर करता था। आगे की चेन इसी तरीके से काम करती थी। इनके खातों से देशभर में दर्ज कई साइबर ठगी के मामलों से जुड़े लेन-देन मिले है।
इनको किया गिरफ्तार

पुलिस ने दिल्ली निवासी विकास कुमार (23) पुत्र पूरण चंद, सूर्यांश (23) पुत्र नीरज वर्मा, अमृतराज (30) पुत्र ललितेश कुमार और आसिफ (33) पुत्र हसन अहमद को गिरफ्तार किया। इनमें से दो स्नातक उत्तीर्ण और दो बारहवीं पास हैं।

कई खातों में डलवाते थे रकम

आरोपी सूर्यांश, अमृतराज और आसिफ मिलकर पूरी चेन चला रहे थे। गिरोह ऐसे व्यक्ति को अपने साथ जोड़ता था, जिसके नाम पर फर्म और बैंक खाते खुलवाए जा सकें। इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मंगवाई जाती थी। किसी खाते में संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक कार्रवाई कर खाता ब्लॉक कर दिया जाता था। इस पर गिरोह नया व्यक्ति तलाशकर उसके नाम से नए खाते खुलवा लेता था। इस तरह साइबर ठगी की रकम को लगातार कई खातों में रोटेट किया जाता था।
कपड़े की दुकान के नाम पर फर्म

जांच में सामने आया कि व्यापारी से ठगे 4.30 लाख रुपए विकास कुमार के बैंक खातों में ट्रांसफर हुए। मुख्य आरोपी सूर्यांश ने विकास कुमार के नाम से आईजीएमएस फर्म खुलवाई थी। इसके बाद विकास के नाम से ही एक कपड़े की दुकान किराए पर ली। इस फर्म और विकास के नाम का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग बैंकों में 4 करंट और 6 सेविंग अकाउंट खुलवाए गए थे। सूर्यांश ने विकास को अपने साथ 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से काम पर रखा था। साइबर ठगी से आने वाली रकम विकास के बैंक खातों में ट्रांसफर होती थी। इसके बाद सूर्यांश इन खातों से रकम निकाल लेता था।

Updated on:
22 Aug 2026 02:06 pm
Published on:
22 Aug 2026 02:04 pm