
बीजेपी (Photo - ANI)
अजमेर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत के बीच जारी 'खींचतान' अब चरम पर पहुंच चुकी है। निकाय चुनाव से पहले गहलोत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ नागौर जिला प्रभारी पद से मुक्त करने का पत्र शीर्ष नेतृत्व को भिजवा दिया है। उन्होंने वीडियो जारी कर देवनानी को खुली चुनौती भी दे डाली है। वीडियो जारी कर उन्होंने कहा- 'देवनानी जी… मैं वीर कुमार का चेला… मिट सकता हूं पर झुकने को तैयार नहीं…।'
पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो जारी कर कहा कि स्वायत्तशासन विभाग ने मुझे 2015 से 2020 और 2021 से जुड़े प्रकरण में नोटिस जारी किए हैं। यह नोटिस जारी करवाने में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया है। सब जानते हैं कि मेरे उनसे राजनीतिक, वैचारिक मतभेद हैं। उन्होंने मुझे दबाव में लेने के लिए ऐसा किया है।
गहलोत ने कहा कि दोनों प्रकरणों से मेरा लेना-देना नहीं है। मैं भाजपा का सच्चा सिपाही और जिम्मेदार कार्यकर्ता रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि भाजपा पर कोई आंच आए और विपक्षी कांग्रेस पार्टी फायदा उठाए। जब तक इन प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक मन पर भारी पत्थर रखते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और निकाय चुनाव के लिए नागौर के प्रभारी पद से भी इस्तीफा देता हूं।
वीडियो में गहलोत ने चुनौती वाले अंदाज में कहा कि 'देवनानी.. आपने मुझे पहचाना नहीं…। मैं वीरकुमार जी का चेला हूं…जो किसी के सामने झुका नहीं…..। धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, तुम्हारे सामने झुकने को तैयार नहीं … तुम्हारे और मेरे बीच लड़ाई जारी रहेगी।
मैंने वीडियो पर जो बोला है, वही मेरा बयान है। भाजपा की सदस्यता और नागौर प्रभारी पद से मुक्त करने का पत्र भेज दिया है। जल्द दोनों प्रकरणों के तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखूंगा। -धर्मेंद्र गहलोत, पूर्व महापौर
इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दो टूक बात कही। उन्होंने कहा कि 'मेरा किसी से कोई मतभेद नहीं है।'
तत्कालीन निगम कमिश्नर के अवकाश के दौरान तत्कालीन महापौर धर्मेन्द्र गहलोत के माध्यम से 13 फाइलों के नक्शे पास हुए थे। इस मामले में न्यायिक जांच शुरू हुई और न्यायिक विभाग ने गहलोत को दोषी माना। इसी मामले में वर्ष 2019 में एसीबी ने जांच शुरू की जिसमें अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली थी।
अब राज्य सरकार ने अभियोजन स्वीकृति एसीबी को दे दी। मामला न्यायिक विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं स्वायत्त शासन विभाग ने उक्त प्रकरण में न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर गहलोत को नोटिस जारी कर सूचित किया है कि क्यों नहीं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत छह वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाए। प्रकरण में तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है।
दूसरी तरफ मामले पर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने भाजपा पर अपने ही नेताओं को डराने-धमकाने को लेकर तंज कसा है। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने, प्रताड़ित करने की बातें सामने आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व अपने ही नेताओं का सम्मान नहीं कर सकता है। ऐसे में जनता के सम्मान और अधिकारों की रक्षा की बातें बेमानी हैं।
पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि वीडियो भाजपा के भीतर कथित रूप से चल रहे दबाव और असंतोष को लेकर सवालिया निशान है। अपने ही साथियों को निशाना बनाने के आरोप भाजपा के लोकतांत्रिक चरित्र पर सवालिया निशान लगाते हैं। शहर कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष विवेक पाराशर ने कहा कि धर्मेंद्र गहलोत हमारे वकील साथी हैं। कोई दबाव, अन्याय अथवा उत्पीड़न के सामने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
Updated on:
20 Aug 2026 08:43 pm
Published on:
20 Aug 2026 08:16 pm
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