प्रदेश के टाइगर रिजर्व में 300 से अधिक मामले
रमेश शर्मा
भरतपुर/ सवाईमाधोपुर. प्रदेश में वन क्षेत्र का दायरा सिमट रहा है। वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण वन भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व भी इससे अछूते नहीं हैं। टाइगर रिजर्व में 300 से अधिक जगह पर भूमि पर अतिक्रमियों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। इनमें रणथम्भौर में 180 व सरिस्का में 150 से अधिक जगह अवैध कब्जे हैं। सिर्फ सरकारी रिकोर्ड के अनुसार ही प्रदेश का 13 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में हैं।
रणथम्भौर में एक ओर तो बाघों का कुनबा लगातार बढऩे से बाघ बाघिनों के लिए विचरण क्षेत्र कम पड़ रहा है और दूसरी ओर वन भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही है। बढ़ते अतिक्रमण वन्यजीवों के रहवास में खलल डाल रहे हैं और उनका क्षेत्र सिमटता जा रहा है। ऐसे में वन्यजीवों को बेहतर पर्यावास नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में सवाईमाधोपुर की कुण्डेरा रेंज के जिस इलाके में अतिक्रमण का मामला सामने आया था, वहां भी बाघिन टी.102 व उसके शावकों का विचरण था। इसी प्रकार खण्डार रेंज में भी कई बाघ-बाघिन विचरण करते हैं।
वन विभाग की दिसम्बर 2021 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वन भूमि पर अतिक्रमण व कब्जे के 12 हजार 225 से अधिक मामले हैं। वहीं प्रदेश में 13 हजार 458 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। जयपुर में 56, अलवर में 610, दौसा 293, सीकर में 525, झुंझुनू में 170, अजमेर में 2, भीलवाड़ा में 39, नागौर में 8, भरतपुर में 64, धौलपुर में 15, करौली में 19, बीकानेर में 4, गंगानगर में 256, हनुमानगढ़ में 60, चुरू में 78, सिरोही में 21, पाली में 2, जालौर में 8, जोधपुर में 182, बाडमेर में 93, जैसलमेर में 9, बूंदी में 184, बारां में 143, झालावाड़ में 1291, कोटा में 841, उदयपुर में 2300, उदयपुर नॉर्थ में 398, चितौडगढ़ में 2, बांसवाड़ा में 0, डूंगरपुर में 533, प्रतापगढ़ में 3 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण हैं।
वनमंत्री ने दिए अतिक्रमण हटाने के निर्देश
हाल ही खण्डार क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। इससे पूर्व भी सामाजिक वानिकी के नाम दर्ज सिनोली स्थित वन भूमि पर भी फसल करने का मामला सामने आया था। बाद में वन विभाग ने भूमि से अतिक्रमण हटा दिया। इससे पूर्व रणथम्भौर की कुण्डेरा रेंज के खाण्डोज वन क्षेत्र में 300 बीघा वन भूमि पर कब्जा करने का मामला सामने आ चुका है। हाल ही रणथम्भौर दौरे पर आए वनमंत्री हेमाराम चौधरी ने वनाधिकारियों की बैठक लेकर रणथम्भौर की वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के निर्देश दिए।
भरतपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंचे तो फायरिंग
भरतपुर जिले के वैर उपखण्ड के गांव रायपुर में वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण है। वनकर्मी और पुलिस इसे हटाने पहुंचे तो अतिक्रमियों ने फायरिंग कर दी। जिले में कई अन्य जगह वन भूमि पर अतिक्रमण हैं, लेकिन मामले न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अभी स्थिति जस की तस बनी हुई है। खनन क्षेत्र में भी कई जगह अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। पहाड़ी, कामां, बयाना, रुदावल, रूपवास, भुसावर आदि क्षेत्रों में खनन होता है। यहां से लगातार अतिक्रमण की मिलती हैं, लेकिन ज्यादातर मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। वैर के रायपुर में हुई फायरिंग और तोडफ़ोड़ के बाद ग्रामीण और वन विभाग की ओर से मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई है। मामले में पैमाइश कराए जाना तय हुआ, लेकिन पैमाइश कार्य नहीं हो पाया है।
वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के प्रयास जारी है। पूर्व में कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया है। इसके लिए विभाग की ओर से विशेष कार्ययोजना तैयारी की जा रही है।
- अरिदंम तोमर, पीसीसीएफए वन विभागए जयपुर।
रायपुर मामले में पैमाइश होनी है। इसको लेकर राजस्व विभाग को पत्र लिखा है। पैमाइश होने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। कुछ और स्थानों पर अतिक्रमण के मामले में कोर्ट में केस विचाराधीन हैं।
- अभिमन्यु सहारण, डीएफओ भरतपुर