अजमेर

Shamefull: कहीं स्टूडेंट्स को मालूम हो गई असलियत, तो पड़ जाएंगे लेने के देने

अव्वल तो कहीं मूल्यांकन की पहल नहीं हुई, तिस पर उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग भी बेखबर हैं।
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Apr 18, 2019
feedback scheme failed
feedback scheme failed

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों के हाथों अपना मूल्यांकन (Feed Back Scheme) नहीं कराना चाहते हैं। ‘खामियां ’ उजागर होने के डर से वे फीडबैक योजना को दबाए बैठे हैं। अव्वल तो कहीं मूल्यांकन की पहल नहीं हुई, तिस पर उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग भी बेखबर हैं। इसके अलावा परिसर में लगाए शिकायत-सुझाव पेटियों पर भी ताले लटके हुए हैं।

यूजीसी ने साल 2013-14 में देश के सभी तकनीकी, मेडिकल, उच्च शिक्षा से संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता के लिए विद्यार्थियों से फीडबैक (Feed Back Scheme) लेने की योजना बनाई। इसमें विभागवार शिक्षकों के अध्यापन, नियमित कक्षाएं, शोध, शैक्षिक और सह शैक्षिक कार्यक्रमों के आयोजन, भ्रमण और अन्य बिन्दु शामिल किए। संस्थाओं में शैक्षिक सुधार ही योजना का मकसद था। केंद्रीय विश्वविद्यालयों को छोडकऱ योजना कहीं लागू नहीं हो सकी।

इंजीनियरिंग कॉलेज के हाल

बॉयज और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में विद्यार्थियों से शिक्षकों और शैक्षिक कार्यक्रमों का फीडबैक नहीं लिया जा रहा। खासतौर पर शिक्षकों को विद्यार्थियों से अपना मूल्यांकन कराना पसंद नहीं है। अंदरूनी स्तर पर कई बार इसका विरोध भी किया गया। ऐसा तब है जबकि अजमेर सहित प्रदेश के कई इंजीनियरिंग कॉलेज में बिना कॉपी जांचे विद्यार्थियों को नम्बर देने, छात्राओं को कथित अश्लील मैसेज भेजने, मनमानी खरीद-फरोख्त, परीक्षा के गलत अंक भेजने जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं।

ना विद्यार्थियों ना शिक्षकों को टाइम
उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में तो मूल्यांकन की कभी शुरुआत ही नहीं हुई। विद्यार्थी और शिक्षक प्रतिवर्ष दाखिले, छात्रसंघ चुनाव, दिवाली, शीतकालीन अवकाश, परीक्षा फार्म भरने और अन्य में व्यस्त रहते हैं। इसके अलावा शिक्षक संघ भी फीडबैक पर सरकार और यूजीसी को ऐतराज जता चुके हैं। शिक्षकों का मानना है कि कक्षाएं लेने के अलावा अतिरिक्त कामकाज बोझ ज्यादा है। विद्यार्थियों के फीडबैक से उन्हें अधिकारियों और नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।

विश्वविद्यालय में गिनती के शिक्षक

महर्षि दयानंद सरस्वती तो ऐसी नवाचार योजनाओं को लागू करने में सबसे पीछे है। यहां महज 18 शिक्षक कार्यरत हैं। सभी शिक्षकों की राय जुदा है। ज्यादातर शिक्षक विद्यार्थियों के हाथों अपना मूल्यांकन और फीडबैक लेने के खिलाफ हैं। यहां के शिक्षक डीन, बॉम सदस्य के अलावा विभिन्न कमेटियों में सदस्य हैं। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की कम संख्या होना भी फीडबैक योजना की नाकामी का मुख्य कारण है।

यहां होता है कामकाज...
शिक्षकों के विद्यार्थियों से मूल्यांकन और फीडबैक को लेकर देश के केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी रोल मॉडल हैं। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों से शिक्षकों के अध्ययन-अध्यापन, शोध, नवाचार को लेकर फीडबैक लिया जाता है। इन संस्थाओं में कुलपति, निदेशक अथवा डीन इस जिम्मेदारी को संभालते हैं।

Published on:
18 Apr 2019 06:32 am