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अजमेर
लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के दाखिलों पर तलवार लटकी हुई है। सत्र 2018-19 के 33 दिन बीत चुके हैं। फिर भी दाखिलों की अनुमति नहीं मिल पाई है।
कॉलेज को 13 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। इसको हर साल महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल ऑफ इंडिया को भेजी जाती है। कौंसिल की मंजूरी के बाद प्रथम वर्ष में दाखिले होते हैं। इस बार भी हालात वैसे ही हैं।
नहीं कर सकते दाखिले
बीसीआई को दी गई अंडर टेकिंग के अनुसार सरकार को अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधन जुटाने हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय का सम्बद्धता पत्र भिजवाना है। सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर दोनों काम अटके हैं। सत्र 2018-19 के 33 दिन बीत चुके हैं। कॉलेज को अब तक प्रवेश की इजाजत नहीं मिली है।
संसाधन और शिक्षकों की कमी
यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित पांच शिक्षक हैं। मौजूदा वक्त एक शिक्षक डेप्युटेशन पर जयपुर तैनात है। उसकी पगार कॉलेज से उठ रही है। एक महिला शिक्षक अवकाश पर हैं। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
नहीं मिली तीन साल की सम्बद्धता
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय एकेडेमिक कौंसिल में इसे पारित कर चुका है। फिलहाल इस पर अमल नहीं हुआ है। तत्कालीन कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली ने विश्वविद्यालय के अकादमिक विभाग को सम्बद्धता पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे, पर अब मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
विश्वविद्यालय से सम्बद्धता पत्र मिलने के बाद ही हम बीसीआई को पत्र भेजकर प्रवेश की अनुमति ले सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने तक प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं हो सकते हैं।
डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज