बीसीआई ने सीमित संसाधन और शिक्षकों को कमी को देखते हुए सरकार से अंडर टेकिंग मांगी थी।
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
लॉ कॉलेज की सम्बद्धता और प्रथम वर्ष के दाखिलों का अता-पता नहीं है। सराकार, बार कौंसिल ऑफ इंडिया और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय कोई परवाह नहीं है। सत्र 2018-19 की शुरुआत के बावजूद दाखिले अटक हुए हैं।
लॉ कॉलेज में प्रतिवर्ष दाखिलों में देरी के चलते विद्यार्थियों को नुकसान होता है। विश्वविद्यालय के केवल एक साल की सम्बद्धता देने, सरकार के रिपोर्ट भेजने में विलम्ब और अन्य कारणों से बीसीआई को दिक्कतें हो रही हैं।
कौंसिल ने बीते वर्ष सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजकर एक के बजाय लॉ कॉलेज को लगातार तीन साल की सम्बद्धता देेने को कहा था। इस पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में निर्णय लिया है। इसके बावजूद मामला जस का तस है।
नहीं शुरू हुए प्रवेश
अजमेर सहित सभी लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के दाखिलों पर तलवार लटकी हुई है। जुलाई के दस दिन बीत चुके हैं। कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने हमेशा की तरह बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बगैर दाखिले नहीं करने की शर्त लगाई है। बीसीआई ने लॉ कॉलेज में सीमित संसाधन और शिक्षकों को कमी को देखते हुए सरकार से अंडर टेकिंग मांगी थी। यह अवधि भी खत्म हो चुकी है।
बनी हुई है शिक्षकों की कमी
यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। राज्य कोटा, नागौर, बूंदी, सीकर, भीलवाड़ा सहित किसी लॉ कॉलेज में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। किसी कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं। कांग्रेस राज में शैक्षिक और गैर शैक्षिक पदों के भर्तियों का फैसला हुआ था, लेकिन इनका भी कोई ठिकाना नहीं है।
फैक्ट फाइल
राज्य में सरकारी लॉ कॉलेज : 15
स्थापना : 2005-06
बीसीआई की स्थायी मान्यता: किसी कॉलेज को नहीं
विद्यार्थियों की संख्या-करीब 15 हजार
सरकार से अनुदान : कुछ नहीं
विश्वविद्यालय से सम्बद्धता मिलने के बाद प्रथम वर्ष में दाखिलों के लिए सरकार और बीसीआई अनुमति देंगे। इसके प्रयास जारी हैं।
डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज