www.patrika.com/rajasthan-news
अजमेर.
वन विभाग देशी और प्रवासी पक्षियों की गणना की तैयारियों में जुट गया है। विभिन्न जलाशयों पर विभाग के कर्मचारी पक्षियों की गणना करेंगे। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी।
वन विभाग प्रतिवर्ष पक्षियों की गणना करता है। इनमें देशी और प्रवासी पक्षी शामिल होते हैं। इस बार भी गणना के लिए वनकर्मियों की विभिन्न जलाशयों पर ड्यूटी लगाई गई है। जिले में आनासागर, फायसागर, किशनगढ में गूंदोलाव झील, ब्यावर में सेलीबेरी, माना घाटी, पुष्कर में गौमुख पहाड़, अरनिया-जालिया के बीच, नारायणसिंह का कुआं, सावर-कोटा मार्ग और अन्य स्थान पर गणना की जानी है।
आनासागर सबसे मुफीद
देशी-विदेशी प्रवासी पक्षियों को आनासागर और इसके आसपास का क्षेत्र सर्वाधिक पसंद है। यहां सागर विहार कॉलोनी के निकट छोटे से हिस्से में पक्षियों की सर्वाधिक तादाद रहती है। यहां पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण, भोजन सहजता से उपलब्ध रहता है। इसके अलावा फायसागर झील में भी पक्षियों की आवक होती है।
अजमेर में आते हैं ये प्रवासी पक्षी
कॉमन टील, रफ, लिटिल स्टैंट, लिटिल ग्रीन हैरोन, व्हाइट थ्रोटेड किंगफिशर, पाइड एवोकेट, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, ग्रेड व्हाइट पेलिकन, लार्ज कैरोमेन्ट, स्मॉल केरोमेन्ट, इंडियन केरोमेन्ट, लौंग टेल्ड श्राइक, लार्ज ईग्रेट, इन्टर मिडिएट इग्रेट, लिटिल ईग्रेट, कॉमन सैंडपाइपर, पौंड हेरोन, येलो वैगटेल, ग्रे वैगटेल, सिटनिर वैगटेल, पाइड वैगटेल, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हैन, ब्लैक टेल्ड गॉडविट, कॉमन स्नाइप, ब्ल्यू रॉक पिजन, इयूरेसिएन कोलार्ड डव, लिटिल ग्रेब और अन्य
पत्रिका ने कराई बर्ड फेर की शुरुआत
राजस्थान पत्रिका के प्रयासों से शहर में दो साल से बर्ड फेयर का आयोजन हो रहा है। इस साल भी बर्ड फेयर होगा। इसमें स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आमजन की भागीदारी होगी।