अजमेर

पूरी दुनिया कर रही योग को सलाम, ये धकेल रहे इसको पीछे

कुलपति की अध्यक्षता वाली एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल ही नीतिगत फैसला लेने में सक्षम हैं।

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May 31, 2019
yoga phd and medal
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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय योग विषय में पीएचडी और दीक्षान्त समारोह में टॉपर्स को स्वर्ण पदक देने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। पूर्व कुलपति की एक साल पहले की गई घोषणा हवा हो गई है। इन प्रस्तावों पर कुलपति की अध्यक्षता वाली एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल ही नीतिगत फैसला लेने में सक्षम हैं।

विश्वविद्यालय में योग विज्ञान एवं मानवीय चेतना विभाग संचालित है। इसमें विभिन्न पाठ्यक्रम चल रहे हैं। पिछले साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। तत्कालीन कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली ने विभाग में जल्द पीएचडी की शुरुआत करने और दीक्षान्त समारोह में विभाग के टॉपर्स को स्वर्ण पदक देने की घोषणा की। उनका मानना था कि योग, व्यायाम और विभिन्न आसन भारतीय पद्धति के आधार हैं। पीएचडी की शुरुआत से भविष्य में विद्यार्थियों को नवीन शोध और टॉपर्स को पदक देने से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा।

एक साल से प्रस्ताव हवा में
पीएचडी और स्वर्ण पदक की योजना बनाने वाले प्रो. श्रीमाली का बीते वर्ष 21 जुलाई को निधन हो गया। इसके बाद से दोनों प्रस्ताव फाइलों में दफन हो गए। इस दौरान प्रो. कैलाश सोडाणी ने करीब 50 दिन बतौर कार्यवाहक कुलपति कामकाज किया। मौजूदा कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के कामकाज पर हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिलनी मुश्किल है।

नहीं है विभाग में स्थाई शिक्षक

विश्वविद्यालय में करीब 15 साल से योग विज्ञान एवं मानवीय चेतना विभाग संचालित है। यहां अब तक स्थाई शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। मौजूदा वक्त डॉ. असीम जंयती देवी और डॉ. लारा शर्मा यहां संविदा पर कार्यरत है। पूर्व कुलपति प्रो. श्रीमाली ने विभाग को उपयोगी बताते हुए सरकार से पद स्वीकृत कराने की योजना भी बनाई। लेकिन बाद में कोई प्रगति नहीं हो सकी।

Updated on:
29 May 2019 08:32 am
Published on:
31 May 2019 07:14 am