
अजमेर . प्रदेश की सरकार ने शायद अजमेर को भुला दिया है। शहर और प्रदेश के लिहाज से अहम सरकारी महकमे कार्यवाहकों के 'भरोसे संचालित है। कहीं ढाई से तीन साल तो कहीं दो महीने से मुखिया का पद खाली है। स्थाई नियुक्तियों के अभाव में महकमों का काम प्रभावित है। इन दफ्तरों-संस्थानों में केवल पत्रावलियां निकल रही हैं। खास फैसले और योजनाएं अटकी हुई हैं।
अध्यक्ष और दो सदस्यों के पद रिक्त
राजस्थान लोक सेवा आयोग में पिछली दो महीने से अध्यक्ष और दो सदस्यों के पद रिक्त हैं। इसी साल 10 जुलाई को डॉ. ललित. के. पंवार के बाद सरकार ने आयोग के सदस्य श्याम सुंदर शर्मा को अध्यक्ष नियुक्त किया। शर्मा का कार्यकाल 28 सितम्बर 2017 को खत्म हो गया। इसके बाद से आयोग में स्थाई अध्यक्ष का पद रिक्त है। इसके अलावा सदस्य एच. एस. खींचड़ और श्याम सुंदर शर्मा के स्थान पर आयोग में दो सदस्य के पद भी रिक्त हैं। मौजूदा वक्त आयोग सदस्य डॉ. आर. डी. सैनी, राजकुमारी गुर्जर, श्याम सिंह राठौड़, सुरजीतलाल मीणा और के. आर. बागडिय़ा के भरोसे संचालित हैं।
ना स्थाई कुलपति ना कुलसचिव
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में पिछले 11 महीने से स्थाई कुलसचिव नहीं है। तत्कालीन कुलसचिव कमल राम मीणा के स्थानांतरण के बाद यहां प्रो. सतीश अग्रवाल, प्रो. बी. पी. सारस्वत अस्थाई कुलसचिव रहे। मौजूदा वक्त पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की रेणु जयपाल के पास कुलसचिव पद का अतिरिक्त प्रभार है। इसी तरह पांच महीने से स्थाई कुलपति का पद रिक्त है। प्रो. कैलाश सोडाणी का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म हुआ था। तबसे बीकानेर के महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाले हुए है। विश्वविद्यालय में सहायक अभियंता का पद भी रिक्त है।
इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य
राजकीय बॉयज और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में मौजूदा वक्त स्थाई प्राचार्य नहीं है। बॉयज कॉलेज में तो वर्ष 2015 से स्थाई प्राचार्य पद रिक्त हैं। इस अवधि में यहां डॉ. डॉ. जे. पी. भामू डॉ. रोहित मिश्रा ने भी अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली। सरकार ने इसी साल 30 मई को राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रो. रंजन माहेश्वरी को कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किया। इसी तरह महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में डॉ. अजयसिंह जेठू इस्तीफा देकर वापस मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में लौट चुके हैं। उनके स्थान पर सरकार ने प्रो. रंजन माहेश्वरी को ही अतिरिक्त दायित्व सौंपा है।
स्थाई निदेशक की नहीं नियुक्ति आयुर्वेद विभाग का अजमेर में निदेशालय है। पूर्व में यहां आयुर्वेद विभाग के वैद्य अथवा आयुर्वेद सेवाधिकारी ही निदेशक बनाए जाते थे। बीते चार-पांच साल से सरकार यहां आरएएस अथवा आईएएस अधिकारियों को ही निदेशक पद का अतिरिक्त दायित्व सौंप रही है। इनमें कई अफसर तो ऐसे रहे जिनका ताल्लुक जयपुर से ज्यादा रहा। इसके चलते वे निदेशालय को ज्यादा समय नहीं दे पाए।