अजमेर

नेताओं के घर हाजिरी दे रहा कॉलेज स्टाफ, यूं गिड़गिड़ा रहे हाथ जोड़कर

कॉलेज को भी सरकार के नियंत्रण में लेने को लेकर स्टाफ ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करना शुरू किया है।
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Updated: 26 Nov 2017, 9:33 PM IST
boys engineering college ajmer
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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

राजकीय बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज को भी सरकार के नियंत्रण शामिल कराने की कोशिशें जारी है। इसके लिए कॉलेज स्टाफ ने मोर्चा संभाला है। स्टाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास जाकर गुहार लगाने में जुटा है। बाद में हस्ताक्षरयुक्त पत्र सरकार को भेजा जाएगा।

अजमेर के महिला सहित झालवाड़ और बारां इंजीनियरिंग कॉलेज अब तक स्वायत्ताशासी संस्थाओं के अधीन संचालित थे। राज्य सरकार ने इन्हें अपने नियंत्रण में लेने का निर्णय लिया है। हालांकि सरकार ने अजमेर के राजकीय बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज से भी प्रस्ताव मांगा था, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में कॉलेज के कुछ शैक्षिक और अशैक्षिक कार्मिकों ने अपनी कोशिशें प्रारंभ की है।

मिल रहे जनप्रतिनिधियों से

बॉयज कॉलेज को भी सरकार के नियंत्रण में लेने को लेकर स्टाफ ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करना शुरू किया है। स्टाफ शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल, संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत, अजमेर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, महापौर धर्मेन्द्र गहलोत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से मिलकर कॉलेज को सरकारी नियंत्रण में लेने का आग्रह करेगा। बाद में इनसे हस्ताक्षर कराकर सरकार को पत्र भेजा जाएगा।

कॉलेज का वित्तीय भार ज्यादा......
तकनीकी शिक्षा विभाग की मानें तो बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत शैक्षिक और अशैक्षिक कार्मिकों का वेतनमान और न्यूनतम वित्तीय भार अन्य कॉलेज की तुलना में ज्यादा है। इसके चलते सरकार जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं है। सरकार कॉलेज के वित्तीय भार, कॉलेज के आय-व्यय और अन्य योजनाओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद ही उच्च स्तर पर कोई फैसला हो सकेगा।

रही है कॉलेज की कई शिकायतें

1996-97 में स्थापित बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज की कई शिकायतें सरकार को मिलती रही हैं। इनमें बिना कॉपियां जांच राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों के नम्बर भेजना, शिक्षक द्वारा छात्रा को अश्लील मैसेज भेजना, गेस्ट फेकल्टी के विद्यार्थियों के नम्बर देने में फर्क, कॉलेज में परीक्षाओं के दौरान समारोह कराना और अन्य मामले शामिल हैं। इसके अलावा मनमाने तरीके से लाखों रुपए की खरीददारी, स्टॉक में सामान नहीं होने, भर्तियों में भाई-भतीजावाद जैसे कथित आरोप भी लगे हैं। सरकार यहां ढाई साल से स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति नहीं कर सकी है।

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