मुकदमों की सुनवाई के लिए न सदस्य और न कर्मचारी न सरकारी वकील प्रशासनिक कार्य के लिए अफसरों व बाबुओं का भी टोटा 41 प्रतिशत पद खाली तो क्या बिना कर्मचारियों के ही चलेगा राजस्व आयुक्तलय
अजमेर.भूमि विवाद की राज्य की सबसे बड़ी अदालत और राज्य में मिनी सचिवालय का दर्जा रखने वाले राजस्व मंडल का विखंडन कर सरकार राजस्व आयुक्तालय बनाना चाहती है। जिससे न्यायिक व प्रशासनिक कार्य अलग-अलग व सुचारू हो। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार का राजस्व मंडल पर ध्यान ही नहीं है। कहने को राजस्व मंडल की कमान मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी के पास है लेकिन यह बेमानी नजर आ रही है वह भी जयपुर से ही राजस्व मंडल चला रहे हैं। राजस्व मंडल घूसकांड में एसीबी ने अध्यक्ष का कम्प्यूटर व फाइलें भी जब्त कर रखी हैं। राजस्व मंडल में ना न्यायिक कार्य के लिए सदस्य व कर्मचारी हैं और न ही प्रशासनिक कार्य के लिए अफसर व बाबू। न तो राजस्व मंडल के न्याय का पहिया आगे बढ़ रहा है और न प्रशासनिक कामकाज की गाड़ी ही।314 पद रिक्तराजस्व मंडल में कर्मचारियों अधिकारियों के स्वीकृत 771 पदों में से 457 पदों पर कर्मचारी अधिकारी कार्यरत है 314 पद रिक्त हैं। देखा जाए तो 59 प्रतिशत पदों पर ही कर्मचारी कार्य कर रहे हैं और उनको रिक्त चल रहे 40 प्रतिशत अन्य कर्मचारियों का कार्य भी करना पड़ रहा है तो ऐसी स्थिति में राजस्व मंडल का कामकाज पहले ही प्रभावित है।
बड़े अधिकारियों के पद ही रिक्त
राजस्व बोर्ड में गजेटेड अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 169 है जिसमें से 93 अधिकारी ही कार्यरत हैं 76 पद रिक्त चल रहे हैं। 20 के मुकाबले केवल 8 सदस्यराजस्व मंडल में मुकदमों की सुनवाई के लिए केवल 20 मे से केवल 8 सदस्य ही उपलब्ध हैं। मंडल में 5 सदस्यीय आईएएस कोटे से 1 सदस्य कार्यरत हैं जबकि 11 सदस्यीय आरएएस कोटे से केवल 3 सदस्य ही मुकदमें सुन रहे हैं। इस कोटे के दो सदस्य एसीबी के हत्थे चढऩे के कारण निलम्बित हो चुके हैं। राजस्व मंडल में 63 हजार मुकदमों लम्बित हैं। संभाग पर सर्किट बेंचों में मुकदों की सुनवाई होने पर समस्या बढ़ेगी।
सरकार की पैरवी के लिए वकील ही नहीं
सरकार के पास अपने मुकदमों की पैरवी के लिए सरकारी वकीलों का भी अभाव है। राजकीय अधिवक्ता का पद पहले ही रिक्त है। अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता का पद भी खाली है। उपराजकीय अधिवक्ता के स्वीकृत 11 में से 6 पद रिक्त हैं। जबकि एसीबी की एफआईआर में नाम दर्ज होने के कारण अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता भी सरकारी मुकदमों की पैरवी नहीं कर रही है।
यह है पदों का विवरण
मंडल में निबन्धक (एलएएआरए) एक पद रिक्त है। संस्थापन अधिकारी के सभी 4 पद ,प्रशासनिक अधिकारियों के 7 पद रिक्त ,अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों के 57 में से 49 पद रिक्त पड़े हैं। लेखाअधिकारी, सहायक लेखाअधिकारी और उपविधि परामर्शी तथा विधि अधिकारी के भी 1-1 पद रिक्त हैं। मंडल तहसीलदार का पद भी खाली है। निजी सचिव के 5 पद खाली है।
नान गजटेड संवर्ग
में यह स्थितिनॉन गजटेड कर्मचारियों के स्वीकृत 602 पदों में से मात्र 364 कर्मचारी कार्यरत हैं और 238 पद खाली हैं। विधि संपादक,पुस्तकालय अध्यक्ष, सम्पादक राविरा के 1-1 पद रिक्त हैं। सहायक प्रशासनिक अधिकारियों के 20 पदों पर कोई भी नियुक्ति नहीं हुई है। कनिष्ठ लेखाकार के 16 में से 4 पद खाली हैं और कनिष्ठ विधि अधिकारियों के भी एक पद पर कोई नियुक्ती नहीं है।
न वरिष्ठ और न कनिष्ठ
मंडल में निजी सहायकों के 11 में से 6 पद रिक्त हैं। सर्वाधिक कार्य करने वाले कनिष्ठ सहायकों के 150 में से 15 पद खाली है। वरिष्ठ सहायकों के 105 पदों में से 43 पद रिक्त हैं। संगणक के 11 में से 10 पद रिक्त है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्वीकृत 118 पदों में से उन 79 पद खाली हैं। जमादारों के 22 में से 12 पद खाली पड़े हैं। वहीं विद्युत व्यवस्था संभालने वाले विद्युतकार का पद भी रिक्त है।
लेखाधिकारी ही नहीं कैसे पूरा हो लेखा -जोखा
राजस्व मंडल के राजस्व का लेखा-जोखा रखने वाले लेखा संवर्ग के अधिकारी कर्मचारियों की स्थिति यह है कि 638 स्वीकृत पदों में से 378 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत है जबकि 260 पद रिक्त हैं। सहायक राजस्व लेखा अधिकारी ग्रेड प्रथम के 64 में से तेरा पद रिक्त हैं। सहायक राजस्व लेखा अधिकारी ग्रेड-2 के 109 में से 60 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और उन 49 पद रिक्त हैं। तहसील राजस्व लेखाकार (टीआरए) के स्वीकृत 468 पदों में से 260 पद खाली पड़े हैं केवल 338 लेखाकार कार्यरत हैं।
यह कार्य छीने जाएंगे राजस्व मंडल से
राजस्व मंडल न्यायिक कार्य के अलावा वर्तमान में राजस्व मंडल तहसीलदार,नायब तहसीलदारो के तबादले,डीपीसी, विभागीय जांच,पटवारी, गिरदावरों के तबादले व डीपीसी, विभागीय परीक्षा, राजस्व महकमे से जुड़े एलडीसी से लेकर कार्यायल अधीक्षक तक के अन्तर जिला तबादले,सभी जिलों को बजट का आवंटन, सिंचाई कर की वसूली,भू राजस्व की वसूली, लगान आदि की वसूली कार्य भी राजस्व मंडल के जिम्मे हैं। तहसीलों का मॉर्डनाईजेशन, रिकॉर्ड डिजिटल करना, फसल गिरदावरी, फसल बीमा, पशु गणना भी राजस्व मंडल करवाता है। अब यह सभी कार्य राजस्व आयुक्तालय को दिए जाएंगे।
राजस्व आयुक्तालय के गठन के लिए यह तर्क
राजस्व आयुक्तालय के गठन के लिए सरकार का मानना है कि वर्तमान में राजस्व प्रशासन एंव राजस्व न्यायालय प्रकरणों के पर्यवेक्षण का कार्य राजस्व मंडल द्वारा किया जाता है। राजस्व मंडल पर प्रशासनिक कार्यों का अत्यधिक कार्यभार होने से राजस्व न्यायालयों के पर्यवेक्षण का कार्य अपेक्षित रूप से नहीं हो पा रहा है। राजस्व आयुक्तालय के गठन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवालय में पिछले माह दो बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। हालांकि राजस्व आयुक्तालय के गठन का राजस्व मंडल सहित अजमेर विरोध हो रहा है।