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PMCIS : राजस्थान सरकार पुष्कर के देसी गुलाब को अजमेर जिले की ‘पंच गौरव’ योजना में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर फूलों की खेती आज भी फसल बीमा योजनाओं से बाहर है। जिले के पुष्कर क्षेत्र में करीब 1000 हेक्टेयर में गुलाब, जबकि 250 से अधिक हैक्टेयर में गेंदा सहित अन्य फूलों की खेती होती है। इसके बावजूद फूलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अथवा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा, रोग और बाजार में गिरावट का पूरा जोखिम किसानों को स्वयं उठाना पड़ रहा है।
गुलाब की खेती को व्यावसायिक और उच्च लागत वाली फसल माना जाता है। एक एकड़ में गुलाब लगाने से लेकर सिंचाई, श्रमिक, खाद और रखरखाव तक करीब 15 से 20 लाख तक खर्च आता है। इसके बावजूद फूलों की खेती अधिसूचित फसल श्रेणी में शामिल नहीं होने से किसानों को बीमा सुरक्षा नहीं मिल पाती।
पुष्कर के देसी गुलाब को सरकार ने जिले की ‘पंच गौरव’ और ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना में शामिल किया है। उद्यान विभाग और एफपीओ के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। गुलाब से गुलकंद, इत्र, गुलाब जल, शर्बत और कॉस्मेटिक उत्पाद तैयार किए जाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, लेकिन बीमा सुरक्षा के अभाव में किसान असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।
फूल उत्पादकों के अनुसार अधिक बरसात और जलभराव के कारण गुलाब और गेंदा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। उमस बढ़ने पर फफूंद और कीट प्रकोप भी तेजी से फैलता है, जिससे उत्पादन घट जाता है। कई बार बाजार में भाव गिरने से किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
अजमेर मंडी से गुजरात, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और तेलंगाना सहित कई राज्यों में फूलों की सप्लाई होती है। अजमेर फूल मंडी में करीब 20 दुकानें संचालित हैं। पुष्कर क्षेत्र में गुलाब व खरवा, नदी, भांवता, डूमाडा और सराधना क्षेत्रों में गेंदा की खेती की जा रही है।
जून के अंत में बरसात शुरू होने से फूलों की फसल एवं लगाई गई फसल खराब होने लगती है। किसानों को बीमा योजना के तहत राहत मिलनी चाहिए।
पूनमचंद मारोठिया, अध्यक्ष, अजमेर फूल मंडी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फिलहाल फूलों को शामिल नहीं किया गया है। इसके लिए किसानों के हित में विभाग के स्तर पर प्रयास जारी हैं।
के. पी. सिंह, उप निदेशक, उद्यान विभाग
Updated on:
08 May 2026 11:17 am
Published on:
08 May 2026 11:16 am
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