
शिक्षा परिषद ने सत्र 2026-27 के लिए जारी किए दिशा-निर्देश
विद्यार्थियों में संचार, नेतृत्व, नवाचार और जीवन कौशल विकसित करने पर रहेगा जोर
गंगापुरसिटी. सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने सत्र 2026-27 के लिए 'प्रबल (PRABAL- Program to Recognize Abilities & Build up Adaptive Life Skills of 21st Century)' कार्यक्रम की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि 21वीं सदी के आवश्यक जीवन कौशल विकसित किए जाएंगे, ताकि वे भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।
परिषद की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी पात्र सरकारी विद्यालयों में कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, तार्किक सोच, समस्या समाधान, संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, नवाचार तथा निर्णय लेने की योग्यता को विकसित करने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है।
गाइडलाइन में बताया गया है कि विद्यालय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों, प्रोजेक्ट, समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण, नवाचार प्रतियोगिताओं और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास किया जाएगा। शिक्षकों को भी विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता के अनुरूप गतिविधियां संचालित करने तथा उनकी प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य
विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के लिए तैयार करना है। इसके तहत आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, सहयोग की भावना, जिम्मेदारी, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे गुणों का भी विकास किया जाएगा। विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर रहेगा, जहां विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को खुलकर प्रदर्शित कर सकें।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद का मानना है कि वर्तमान समय में पारंपरिक शिक्षा के साथ जीवन कौशल और व्यवहारिक दक्षताओं का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के तहत 'प्रबल' कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्था प्रधानों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्हें निर्धारित गतिविधियों का नियमित संचालन कर विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भविष्य की उच्च शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। 'प्रबल' कार्यक्रम नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।