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राजस्थान: डिप्टी सीएम बताकर खुद का तबादला कराने का मामला, पुलिस ने नर्सिंग ऑफिसर को माना दोषी; भेजा नोटिस

उप मुख्यमंत्री प्रेमचन्द बैरवा के नाम का दुरुपयोग कर चिकित्सा विभाग के अधिकारियों पर स्वयं के तबादले का दबाव बनाने वाले जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर के खिलाफ सदर कोतवाली थाना पुलिस ने जांच पूरी कर ली है।
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Nursing Officer Pushpendra Pareek

नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेन्द्र पारीक। पत्रिका फाइल फोटो

अजमेर। उप मुख्यमंत्री प्रेमचन्द बैरवा के नाम का दुरुपयोग कर चिकित्सा विभाग के अधिकारियों पर स्वयं के तबादले का दबाव बनाने वाले जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर के खिलाफ सदर कोतवाली थाना पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। पुलिस ने आरोपी को नोटिस जारी करते हुए अभियोजन स्वीकृति के लिए न्यायालय को प्रकरण की फाइल भेजी है। जानकारी अनुसार कोतवाली थाना पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेन्द्र पारीक को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में दर्ज प्रकरण के अनुसंधान में प्रथम दृष्ट्या दोषी पाया है।

पुलिस ने 7 साल से कम सजा के मामले में नर्सिंग ऑफिसर नोटिस जारी किया है। वहीं अभियोजन स्वीकृति के लिए पत्रावली न्यायालय को भेजी है। स्वीकृति मिलने के बाद पुलिस आरोपी के खिलाफ चार्जशीट पेश करेगी। इसके बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी।

ओएसडी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला

राजस्थान के उप मुख्यमंत्री प्रेमचन्द बैरवा के ओएसडी भगवतसिंह राठौड़ द्वारा 25 जून को स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव व सदर कोतवाली थाना पुलिस को भेजी शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया कि नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेन्द्र पारीक ने मोबाइल फोन की कॉलर आईडी इस तरह सेट की थी कि उसके कॉल करने पर ट्रूकॉलर पर उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का नाम प्रदर्शित होता था।

शिकायत के अनुसार आरोपी ने स्वयं को उप मुख्यमंत्री बताकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय के विशिष्ट सहायक बलवंत लिगरी को फोन कर स्वयं का जेएलएन अस्पताल में स्थानान्तरण कराने के निर्देश दिए। उसने जेएलएन अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे को भी फोन कर स्वयं को उप मुख्यमंत्री बताते हुए मनचाहा कार्य आवंटित करने का दबाव बनाया था।

ड्यूटी पर लौटा आरोपी, रिपोर्ट नहीं मिली

इधर, आरोपी नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक ने ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का कारण बीमारी बताते हुए ड्यूटी जॉइन कर ली है। बिना सूचना गैरहाजिर रहने के मामले में पुष्पेन्द्र पारीक के ड्यूटी पर लौटने के बाद भी अस्पताल अधीक्षक डॉ.अरविन्द खरे को जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। डॉ. खरे ने प्रकरण सामने आने के बाद पारीक के बिना सूचना पर गैरहाजिर रहने की जांच डॉ. रमाकान्त दीक्षित को दी थी।

आरोपी को नोटिस, पत्रावली कोर्ट भेजी

आईटी एक्ट में दर्ज प्रकरण की जांच में आरोप प्रमाणित माने गए हैं। आरोपी को नोटिस जारी किया गया है।वहीं अभियोजन स्वीकृति के लिए पत्रावली भेजी है।
-रामेश्वरी देवी, थानाप्रभारी सदर कोतवाली