
अजमेर.
रंगों का त्यौंहार होली शहर में पारम्परिक तरीके से मनाया जा रहा है। सोमवार को लोगों ने विभिन्न स्थानों पर मंत्रोच्चार से पूजा-अर्चना के साथ होलिका दहन कर घर-परिवार में खुशहाली की कामना की। अब मंगलवार को धूलंडी मनाई जाएगी। लोग मस्ती से होली खेलें पर आंखों, स्किन और सेहत का ख्याल जरूर रखें।
लगाएं स्किन पर क्रीम
होली खेलने से पहले स्किन पर क्रीम या लोशन लगाएं। इससे आपकी स्किन को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचेगा। साथ ही त्वचा मुलायम बनी रहेगी।
आंखों पर लगाए चश्मा
गुलाल-रंग आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लिहाजा आंखों पर सन ग्लास या अन्य चश्मा लगा सकते हैं। इससे आपकी आंखें घातक रंगों के प्रभाव से बची रहेंगी। रंग डालने वालों को भी आंखों से रंग दूर रखने को कहें।
ना खाएं ज्यादा ठंडा-गर्म
मार्च के मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। अभी भी मौसम में हल्की ठंडक कायम है। बहुत ज्यादा ठंडा खाने से गला खराब हो सकता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा गर्म खाने से भी पेट में जलन या अन्य रोग हो सकते हैं। इसीलिए होली पर संतुलित आहार ही लें।
किया होलिका दहन
शहर के होलीदड़ा, नया बाजार, पुरानी मंडी, मदार गेट, कवंडसपुरा, डिग्गी बाजार, ऊसरी गेट, दरगाह बाजार, नला बाजार, आदर्श नगर, बिहारी गंज, प्रकाश रोड, धौला भाटा, अलवर गेट, रामगंज, केसरगंज, सुभाष नगर, शास्त्री नगर, नाका मदार, गुलाबबाड़ी, वैशाली नगर, बी.के. कौल नगर, हरिभाऊ उपाध्याय नगर, लोहागल रोड, पंचशील, फायसागर रोड सहित अन्य इलाकों में चौराहों-मैदान में होली बनाई गई। शुभ मुर्हूत के अनुसार होलिका का विधि विधान से दहन किया गया। इस दौरान भक्त प्रहलाद को प्रतीकात्मक रूप से बचाया गया। लोगों ने होलिका की फल-फूल,मिठाई, गोबर की माला, नारियल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
Read More: happy holi कहीं बरसेंगे कोड़े, कहीं बादशाह खेलेंगे रंग
शुरू होंगे इंटीग्रेटेड लॉ, बी.फार्मा और बीए-बीएससी बीएड कोर्स
अजमेर. विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में बी.फार्मा, बीए-बीएससी बीएड और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में भी दाखिले मिल सकेंगे। सत्र 2020-21 से यह कोर्स शुरू होंगे। 32 साल में यह पहला मौका होगा, जबकि यूनिवर्सिटी में स्नातक स्तर के कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं।
1987 में स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में कला, वाणिज्य और विज्ञान में स्नातकोत्तर विषयके कोर्स ही संचालित हैं। इनमें इतिहास, जनसंख्या अध्ययन, रिमोट सेंसिंग, माइक्रोबायलॉजी, मैनेजमेंटस्टडीज, पत्रकारिता, एलएलएम, हिंदी और अन्य कोर्स हैं। कैंपस में संचालित कोर्स में महज 800-900 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जबकि विद्यार्थियों का रुझान स्नातक स्तरीय कोर्स में प्रवेश लेकर कॅरियर बनाने में ज्यादा है।