घोड़ों पर सवारी और करतब देखने की इच्छा पूरी नहीं होगी। अश्ववंश लाने व ले जाने पर लगाई गई पाबंदी यथावत लागू रहेगी।
पुष्कर में इस बार घोड़े दिखाई नहीं देंगे। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की इस बार घोड़ों पर सवारी और करतब देखने की इच्छा पूरी नहीं होगी। पशु मेले में अश्ववंश लाने व ले जाने पर लगाई गई पाबंदी यथावत लागू रहेगी।
इस संबंध में सपुष्कर उपखंड कार्यालय में पशुपालकों व पशुपालन विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें विभाग के अतिरिक्त निदेशक भवानी सिंह ने पाबंदी के आदेश वापस लेने से इन्कार कर दिया। वहीं दूसरी ओर पशुपालकों ने कहा कि मेला मैदान आ रहे अश्ववंश पालकों के साथ ज्यादती करने पर सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने आदेश के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की चेतावनी देते हुए आरोप लगाया कि सरकार पुष्कर पशु मेले को पूरी तरह खत्म करना चाहती है।
अजमेर जिले के पाटन गांव में एक अश्व में ग्लैंडर बीमारी पाए जाने पर पुष्कर मेले में अश्ववंश लाने-ले जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। रविवार को पशुपालकों ने जिला कलक्टर गौरव गोयल को ज्ञापन देकर पाबंदी हटाने की मांग की थी। गोयल की पहल पर सोमवार शाम उपखंड कार्यालय में पशुपालकों के साथ बैठक हुई। इसमें पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक भवानी सिंह, संयुक्त निदेशक डॉ. एस. एस. चांदावत, उपखंड अधिकारी विष्णु गोयल सहित पशुपालक मौजूद थे।
बैठक में पशुपालक प्रतिनिधि शक्तिसिंह पीपरोली ने पशुपालन विभाग पर पशु मेले को खत्म करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिना जांच किए आनन-फानन में आदेश जारी कर दिया गया।
पाटन में जिस घोड़े के ग्लैंडर रोग से पीडि़त होना बताया गया है उसकी जांच के सैम्पल आज तक घोड़ा मालिक को नहीं दिए गए हैं। बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारी आदेश पर तटस्थ रहे। उन्होंने मेले के दौरान अश्ववंश पर पाबंदी यथावत रहने की बात कही। पशुपालकों ने इस पर असंतोष जताया तथा बैठक बेनतीजा रही।
पुष्कर मेले में अश्ववंश की आवक-जावक प्रतिबंधित रहेगी। संक्रमित बीमारी होने के कारण सरकारी स्तर पर कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता है।
- भवानी सिंह, अतिरिक्तनिदेशक, पशुपालन विभाग जयपुर