अजमेर

कई विदेशी भाषाओं को जन्म दिया है संस्कृत ने, हम ही भूला बैठे इसको

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Sep 15, 2018
sanskrit language

अजमेर.

संस्कृत वैज्ञानिक भाषा के साथ-साथ हमारी संस्कृति की परिचायक भी है। संस्कृत के वैभव को हमें पुन: शिखर पर पहुंचाने के प्रयास करने चाहिए। यह बात सम्राट पृथ्वीराज पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. स्नेह भटनागर ने सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह समापन समारोह में कही।

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राजकीय कन्या महाविद्यालय में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि संस्कृत कई विदेशी भाषाओं की जननी भी है। संस्कृत में मधुरता, भाषायी कौशल और संस्कारों को बढ़ाने की योग्यता है। वैज्ञानिकों ने भी संस्कृत की प्राचीनता और मान्यता को स्वीकार किया है। कन्या महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. चेतन प्रकाश ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति का गौरव है। हमें इसके उत्थान के प्रयास करने चाहिए।

संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौड़, प्रांत संगठन मंत्री देवेंद्र पांड्या ने संस्कृत की महत्ता बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान विभिन्न संस्थाओं में श्लोक प्रतियोगिता, मंत्र अथवा श्लोकाधारित चित्र निर्माण, संस्कृत संवाद वाटिका, संस्कृत कथावाचन, पात्राभिनय प्रतियोगिता, संस्कृत संगोष्ठी, संस्कृत दृश्य एंव श्रव्य प्रस्तुतिकरण, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। राजकीय कन्या महाविद्यालय में कनिष्ठ और वरिष्ठ संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता हुई।

इस दौरान मयूर स्कूल, डेमोंस्ट्रेशन, सेंट्रल एकेडमी, राजकीय सावित्री उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुरुनानक, सम्राट पब्लिक, द टर्निंग पॉइन्ट और अन्य स्कूल के विद्यार्थियों ने रचना सुनाई। निर्णायक डॉ. निरंजन साहू, डॉ. सुधा वर्मा, डॉ. विमलेश शर्मा निर्णायक थे।

प्रतियोगिताएं संस्कृत भारती के विष्णुशरण शर्मा के निर्देशन में हुई। विभाग संयोजक डॉ. आशुतोष पारीक ने कार्यक्रमों कीजानकारी दी। डॉ. एस. के. शर्मा, एस. के. जैन, डॉ. उमेश भार्गव और अन्य मौजूद थे। संचालन डॉ.के.आर महिया ने किया।

हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता

काशी नरेश वी. नारायणसिंह अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल की टीम ने शानदार प्रदर्शन कर चौथी बार खिताब पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य विद्यालय देहरादून के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में देश की 16 टीम ने भाग लिया। प्रतियोगिता के प्रथम चरण का विषय प्रतियोगिता के कारण युवा वर्ग तनाव में है तथा दूसरे चरण का विषय कृत्रिम बुद्धिमता आज सामाजिक परिवेश की आवश्यकता है।

अंतिम चरण का विषय धर्म और विज्ञान एक साथ रह सकते हैं रहा। राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल की टीम ने हिंदी विभागाध्यक्ष हरीश चंद्र के नेतृत्व में भाग लिया। स्कूल के कैडेट सांध्यदीप त्रिपाठी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस दौरान कैडेट सुधांशु सुमन भी मौजूद रहे मुख्य अतिथि एयर मार्शल ए.एस. पठानिया थे। टीम के वापस लौटने पर प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल अमित डागर, प्रशासनिक अधिकारी यशस्वी शेखावत, शिक्षा प्रभारी महेंद्र पाल सिंह ने स्वागत किया।

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Published on:
15 Sept 2018 09:25 am
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