अजमेर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक

160 से अधिक देशों में होता है मसालों का निर्यात, लगभग 1.9 करोड़ किसान परिवारों की जुड़ी है आजीविका

3 min read
Mar 05, 2026
अजमेर. इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेले की जानकारी देते केन्द के निदेशक डॉ. भारद्वाज।

अजमेर (Ajmer news). भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश है। वर्तमान में देश में लगभग 44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मसालों की खेती होती है तथा 111.55 लाख टन उत्पादन के साथ इसका वार्षिक मूल्य लगभग 37,000-40,000 करोड़ रुपए है। तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने यह जानकारी गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में दी।

1.9 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका

उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर भारत का 48 प्रतिशत उत्पादन एवं 43 प्रतिशत मूल्य हिस्सेदारी है। देश से 160 से अधिक देशों में 15-18 लाख टन मसालों का निर्यात होता है। इस क्षेत्र से लगभग 1.9 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। पिछले दो दशकों में मसाला क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें उत्पादन में 186 प्रतिशत, क्षेत्रफल में 86 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 54 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं

उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत का मसाला निर्यात लगभग 1.53 मिलियन टन (4.18 बिलियन डॉलर) है। यह वैश्विक निर्यात में 17.2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। इसके 2030 तक 6.71 बिलियन डॉलर तथा 2047 तक 22.95 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग, न्यूट्रास्यूटिकल बाजार का विस्तार, एथनिक व्यंजनों की लोकप्रियता तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी इस वृद्धि के प्रमुख कारक हैं। मसाले बागवानी फसलों में निर्यात आय के मामले में प्रथम तथा सभी कृषि वस्तुओं में चौथे स्थान पर हैं। इससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं बनती हैं। 

वैश्विक उत्पादन में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी

उन्होंने बताया कि भारत में बीजीय मसालों का लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। वैश्विक उत्पादन में इनकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। निर्यात बाजार में भारत का लगभग 70 प्रतिशत प्रभुत्व है तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों से लगभग 4,500 करोड़ का वार्षिक व्यवसाय होता है। हालांकि गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता अभी भी चुनौती है। इस क्षेत्र में लगभग 20,000 टन की आवश्यकता के मुकाबले केवल 30 प्रतिशत उपलब्धता है।

कई चुनौतियों का सामना

बीजीय मसाला क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें जलवायु परिवर्तन, जलसंकट, भूमिक्षरण, कीट-रोगों का बढ़ता दबाव, गुणवत्ता संबंधी समस्याएं, मिलावट, अवशेषों की समस्या तथा निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों की कमी प्रमुख हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च गुणवत्ता उत्पादन, ट्रेसबिलिटी प्रणाली, अच्छे कृषि अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, मूल्य संवर्धन तथा ब्रांडिंग आवश्यक है।

जैविक खेती तथा जलवायु-सहिष्णु किस्मों का विकास

तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने बताया कि भविष्य की रणनीति में जीनोमिक्स आधारित प्रजनन, जीन संपादन (सीआरआईएसपीआर), जीनोमिक चयन, डिजिटल कृषि, ब्लॉक चेन ट्रेसबिलिटी, आईओटी आधारित निगरानी, जैविक खेती तथा जलवायु-सहिष्णु किस्मों का विकास शामिल है।

अजमेर में इंडस्ट्री मीट व किसान मेला कल

तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेला शनिवार को आयोजित किया जाएगा। संस्थान के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती संबंधी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। केन्द के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर से 2000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। इनमें किसान, कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, उद्योग प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग शामिल होंगे।

संस्थानों और उद्योगों के बीच एमओयू

उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री मीट का शुभारम्भ सुबह 9 बजे होगा, जबकि किसान मेला सुबह साढ़े 11 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी होंगे। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग भारत सरकार के सचिव डॉ. मांगीलाल एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक भी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के विचार-विमर्श, तकनीकी प्रस्तुतियां, प्रौद्योगिकी पुस्तिका का डिजिटल विमोचन तथा विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के बीच एमओयू भी होंगे।

Published on:
05 Mar 2026 09:25 pm
Also Read
View All

अगली खबर