kishangarh airport news : किशनगढ़ एयरपोर्ट से भी जल्द ही एयरबस और बड़े विमानों की आवाजाही हो सकेगी। यहां रन वे विस्तार की कवायद तेज हो गई है। टूंकड़ा क्षेत्र की अरावली पहाडिय़ों की दो चोटियां कटेंगी। गगवाना स्थित प्रसार भारती का टावर भी अन्यत्र शिफ्ट होगा। राज्य सरकार ने जिला कलक्टर से एस्टीमेट मांग लिया है।
कालीचरण.
अजमेर. किशनगढ़ एयरपोर्ट (kishangarh airport) भी जल्द ही दुनिया के बड़े शहरों के हवाई अड्डों की तरह इंटरनेशनल हवाई अड्डों की कतार में शामिल हो जाएगा। एयरपोर्ट और इसके रन-वे विस्तार में टूंकड़ा की अरावली पहाडिय़ों की चोटियां और गगवाना स्थित प्रसार भारती के टावर की ऊंचाई अड़चन के रूप में सामने आई हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
पहली अड़चन
वर्तमान में टूंकड़ा क्षेत्र की अरावली की दो तरफ की ऊंची चोटियां बाधा बनी हुई है। एक पहाड़ी की ऊंचाई करीब 173 मीटर और दूसरी पहाड़ी की ऊंचाई करीब 168 मीटर है। सर्वे में इन दोनों पहाडिय़ों की ऊंचाई करीब 150 मीटर ही होना तय माना गया है। ऐसे में एक पहाड़ी की ऊंचाई करीब 23 मीटर और दूसरी पहाड़ी की ऊंचाई 18 मीटर कम होगी तो ही एयरबस ए-320 (180 या इससे अधिक सीटर) और बड़े विमान आसानी से एयरपोर्ट से लेंडिंग और टेक ऑफ कर सकेंगे।
दूसरी अड़चन
गगवाना स्थित टावर की करीब 71 मीटर ऊंचाई विमानों के संचालन में बाधा के रूप में सामने आएगी। अब सरकार के समक्ष इस टावर को अन्यत्र शिफ्ट करने या फिर तकनीकी रूप से इसकी ऊंचाई को कम किए जाने का ही रास्ता बचा है। इसके बाद ही इसके पास से विमानों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। अब जिला प्रशासन को इन दोनों ही कार्य के खर्च का ब्यौरा तैयार करना होगा।
एक किलोमीटर रन वे और टर्मिनल भवन का होगा विस्तार
वर्तमान एयरपोर्ट के रन वे की लग्बाई दो किलोमीटर (2000 मीटर) है और एयरबस और अन्य दूसरे बड़े विमानों की लेंडिंग और टेक ऑफ के लिए एक किलोमीटर लम्बाई (1000 मीटर) और बढ़ाई जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही मोटाई बढ़ाने और अन्य तकनीकी रूप से भी रन वे को तैयार किया जाएगा।
सर्वे में सामने आई थीं यह बाधाएं
भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के योजना मुख्यालय ने अभी हाल ही में किशनगढ़ एयरपोर्ट और रन वे विस्तार का सर्वे कार्य पूरा किया। योजना मुख्यालय की टीम के सामने इस कार्य में टूंकड़ा की अरावली पहाडिय़ों की चोटियां और गगवाना स्थित प्रसार भारती के टावर की ऊंचाई अड़चन के रूप में सामने आई। इस पर भाविपप्रा के योजना मुख्यालय ने सिविल एविएशन के सैक्रेटरी को इन अड़चनों को दूर करने के लिए खत लिखा। सैक्रेटरी ने इसके लिए अब राज्य सरकार को एयरपोर्ट विस्तार में आ रही इन दोनों बाधाओं को दूर करने के लिए कहा है। राज्य सरकार ने भी इसकी क्रियांविती शुरू कर दी है और अजमेर के जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा को उक्त दोनों कार्य में होने वाले खर्च का एस्टीमेट बनाने के लिए कहा है। ताकि जल्द ही एयरपोर्ट विस्तार के कार्य को पूरा किया जा सके। एयरपोर्ट प्रबंधन भी इसके लिए जिला प्रशासन से सम्पर्क साध रहा है।
इनका कहना है....
किशनगढ़ एयरपोर्ट के विस्तार के लिए टूंकड़ा की पहाडिय़ों और प्रसार भारती के टावर की ऊंचाई बाधा बने हुए हैं। सरकार ने जिला प्रशासन से इन कार्यों पर होने वाले खर्च का एस्टीमेट मांगा है। रन वे विस्तार के बाद यहां से इंटरनेशनल एयरपोर्ट की भांति एयरबस और बड़े विमानों की भी आवाजाही शुरू हो जाएगी।
-अशोक कपूर, निदेशक, किशनगढ़ एयरपोर्ट।