अजमेर

ऐसे रूठे इंद्रदेव….बादल भूल गए बरसना, सूरज को आया बड़ा मजा

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Aug 08, 2018
low rain in ajmer

अजमेर

जिले में मानसून की सुस्ती कायम है। पिछले 14 दिन से बादल छाने हवा चलने और धूप-छांव का दौर जारी है। मानसून के इस साल के 57 दिन और बचे हैं। इस दौरान जिले को 346.72 मिलीमीटर बारिश की जरूरत है। बड़े और छोटे जलाशयों में नाममात्र का पानी है। अगर बरसात नहीं हुई तो खेतों और लोगों को पर्याप्त पानी नसीब नहीं होगा।

प्रदेश और जिले में मानसून 1 जून से 30 सितम्बर (122 दिन) तक सक्रिय रहता है। इस दरम्यान होने वाली बारिश से खेतों में सिंचाई, तालाबों-बांधों में पानी आता है। साथ ही साल भर जलापूर्ति के लिए पानी मिलता है। मानसून के 122 में से 65 दिन बीत चुके हैं। अब मात्र 57 दिन यानि अगस्त के 27 और सितम्बर के 30 दिन और बचे हैं। इस दौरान होने वाली बरसात ही जिले के लिए वरदान साबित होगी।

पर्याप्त बारिश के दावे हवा

मौसम विभाग, स्काईमेट सहित अन्य संस्थाओं ने साल 2018 में 93 से 95 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया था। खासतौर पर अगस्त और सितम्बर में अच्छी बारिश के दावे किए गए। लेकिन मानसून जुलाई के चौथे सप्ताह में ही सुस्त पड़ गया। खासतौर पर राजस्थान में अजमेर सहित अधिकांश जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। अजमेर, जयपुर जिले की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध में मामूली पानी की आवक हुई है।

पांच साल में नहीं पर्याप्त बरसात

मानसून पिछले पांच साल में अजमेर जिले पर ज्यादा मेहरबान नहीं हुआ है। यह कभी जून अंत तो कभी जुलाई के पहले पखवाड़े में सक्रिय होता रहा है। अलनिनो प्रभाव के चलते जिले में पर्याप्त बरसात नहीं हुई है। इस अवधि में जिले में कई बड़े जलाशयों में तो नाम मात्र का पानी पहुंचा है। साल 2012 में 520.2, 2013 में 540, 2014 में 545.8, 2015 में 381.44, 2016 में 512.07 और 2017 में 450 मिलीमीटर बरसात ही हो पाई।

नहीं है जलाशयों में पानी

जिले के छोटे और बड़े जलाशयों में पानी नहीं है। इनमें राजियवास, बीर, मूंडोती, पारा प्रथम और द्वितीय, बिसूंदनी, मकरेड़ा, रामसर, अजगरा, ताज सरोवर अरनिया, नारायण सागर खारी, मान सागर जोताया, देह सागर बडली, भीम सागर तिहारी, खानपुरा तालाब शामिल है। इसी तरह चौरसियावास, लाकोलाव टैंक हनौतिया, पुराना तालाब बलाड़, जवाजा तालाब, देलवाड़ा तालाब, छोटा तालाब चाट, बूढ़ा पुष्कर, मान सागर जोताया, कोडिय़ा सागर अरांई, जवाहर सागर सिरोंज, सुरखेली सागर अरांई, बिजयसागर लाम्बा, विजयसागर फतेहगढ़, बांके सागर सरवाड़ में भी पानी ज्यादा नहीं है।

यहां मापी जाती है बरसात

अजमेर, श्रीनगर, गेगल, पुष्कर, गोविन्दगढ़, बूढ़ा पुष्कर, नसीराबाद, पीसांगन, मांगलियावास, किशनगढ़, बांदरसिदरी, रूपनगढ़, अरांई, ब्यावर, जवाजा, टॉडगढ़, सरवाड़, केकड़ी, सावर, भिनाय, मसूदा, बिजयनगर, नारायणसागर और अन्य

Published on:
08 Aug 2018 10:32 am
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