
अजमेर
घटाओं ने आषाढ़ को खामोशी से ही बीत जाने दिया। आषाढ़ में पिछले दस दिन तक बादल बरसने के बजाय मुंह चिढ़ाते रहे। अब शनिवार से सावन शुरू हुआ है। सावन में ही शहर और जिले को झमाझम बरसात की उम्मीद है।
सुबह से ही आसमान पर बादल छाए रहे। हवा चलने और बादलों के कारण मौसम खुशनुमा रहा। दोपहर बाद हल्की उमस गर्माहट रही। मौसम विभाग ने बीते चौबीस घंटे में 0.1 मिलीमीटर बरसात दर्ज की।
आषाढ़ बीता सावन से उम्मीद
बीती 29 जून को आषाढ़ की शुरुआत के वक्त जिले में महज 46.6 मिलीमीटर बरसात हुई थी। अधिकांश बड़े जलाशय और तालाब खाली पड़े थे। जुलाई के शुरुआती 10-12 दिन में शहर और जिले के कई हिस्सों में अच्छी बरसात हुई। 14 जुलाई तक बरसात का आंकडा़ 94.56 मिलीमीटर था। इसके बाद 15 से 26 जुलाई तक जिले के कुछ हिस्सों में झमाझम बरसात तो कहीं छिटपुट फुहारें ही पड़ी हैं। अलबत्ता बरसात का आंकड़ा 203.28 मिलीमीटर हो गया है। अब सावन में शहर और जिले को झमाझम बरसात की उम्मीद है।
चाहिए 346.72 मिमी बरसात
प्रदेश और जिले में मानसून 1 जून से 30 सितम्बर सक्रिय रहता है। जिले की कुल औसत बरसात 550 मिलीमीटर मानी गई है। इस लिहाज से अब मानसून के 66 दिन और बचे हैं। इस अवधि में 346.72 मिलीमीटर बरसात की जरूरत है। इसके बाद ही कुल औसत बरसात का आंकड़ा पूरा हो सकेगा।
पांच साल से कम बारिश..
मानसून पिछले पांच साल में अजमेर जिले पर ज्यादा मेहरबान नहीं हुआ है। यह कभी जून अंत तो कभी जुलाई के पहले पखवाड़े में सक्रिय होता रहा है। इस बार भी जिले के कई जलाशयों में तो नाम मात्र का पानी पहुंचा है। साल 2012 में 520.2, 2013 में 540, 2014 में 545.8, 2015 में 381.44, 2016 में 512.07 और 2017 में 450 मिलीमीटर बरसात ही हो पाई।
नेताओं के पैर छूने लगे दावेदार
कॉलेज और विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव लडऩे वाले दावेदार और छात्रसंघ पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इसमें कांग्रेस और भाजपा नेताओं के अलावा छात्र संगठन और चुनाव लडऩे के इच्छुक प्रत्याशी शामिल हैं। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही यह सभी संस्थाओं के पैनल जारी करेंगे।
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में छात्रसंघ चुनाव होंगे। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पद शामिल है। चुनाव में प्रमुख रूप रूप से एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। कहीं-कहीं निर्दलीय प्रत्याशियों से भी दोनों संगठनों को करारी हार मिलती रही है। इस बार भी एनएसयूआई और एबीवीपी में ही सीधी टक्कर दिख रही है।