अजमेर

अजमेर के अली अकबर को लेकर बड़ा खुलासा, राजस्थान सहित इन राज्यों में स्लीपर सेल बनाने का मिला था टास्क

Rajasthan News: हरियाणा अम्बाला की स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़ा ऑटो चालक अली अकबर अजमेर से सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क चला रहा था।

2 min read
Mar 18, 2026
अली अकबर। पत्रिका फाइल फोटो

अजमेर। हरियाणा अम्बाला की स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़ा ऑटो चालक अली अकबर अजमेर से सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क चला रहा था। पहले रेलवे स्टेशन की पार्किंग और फिर ऑटो रिक्शा चलाने के दौरान वह लॉरेंस विश्नोई के पंजाब नेटवर्क के सम्पर्क में आ गया। यहीं से उसकी अपराध की दुनिया में शुरूआत हुई। यह खुलासा अली अकबर और उसके साथियों ने प्रकरण में अनुसंधान कर रही सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी और एटीएस को किया है।

जांच में सामने आया है कि अली अकबर लॉरेंस गैंग के गुर्गों को शहर में ठहराने और उनके लिए होटल-गेस्ट हाउस की व्यवस्था करता था। रेलवे स्टेशन पर ऑटो चलाने के दौरान वह बाहर से आने वाले जायरीन व मेहमानों को दरगाह क्षेत्र में ठहराता था। ऑटो रिक्शा के अलावा गेस्ट हाउस में कमरा दिलवाने के लिए उसको अतिरिक्त कमाई होती थी।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में आतंकी साजिश के नेटवर्क का ​खुलासा, हनुमानगढ़ में ब्लास्ट की थी योजना; अजमेर का युवक अरेस्ट

इसी दौरान वह लॉरेंस के पंजाब नेटवर्क के सम्पर्क में आया। जिसके जरिए वह पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी के जुड़ गया। बताया जा रहा है कि अली अकबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भट्टी से डेढ़ साल पहले सम्पर्क में आया। जिसके बाद आतंकी साजिश को आगे बढ़ाने और बातचीत के लिए ‘सिग्नल’ एप का इस्तेमाल किया जाने लगा। फिलहाल एनआईए और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां गहनता से नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।

मिला था रुपयों का लालच

जांच एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी ने अली अकबर को राजस्थान के साथ-साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में स्लीपर सेल तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। इसके लिए उसे प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपए तक का लालच भी दिया था। हालांकि इससे पहले कि नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय होता उससे पहले अंबाला एसटीएफ ने पंजाब पुलिस के इनपुट पर कार्रवाई करते हुए अली अकबर, मेरठ निवासी अनस और कंबासी निवासी जंगबीर को दबोचा। उनसे करीब 1 किलो 975 ग्राम आरडीएक्स बरामद किया।

सर्विसलांस पर थे तीनों

प्रकरण में चौथे आरोपी के पंजाब से गिरफ्तार होने की बात सामने आई है। उसको आरडीएक्स की खेप सौंपी जानी थी। पड़ताल में जुटी सुरक्षा एजेंसियों को आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जिसमें डिलीट चैट व लोकेशन डेटा को रिकवर करने का काम किया जा रहा है।

गौरतलब है कि आरोपी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म, सिग्नल एप के जरिए अलग-अलग शहरों की लोकेशन साझा कर रहे थे। पैसों के लालच में नेटवर्क से जुड़ गए लेकिन पंजाब की सुरक्षा एजेंसियां लम्बे समय से इन पर नजर रखे हुए थीं।

पंजाब नेटवर्क से भट्टी से सम्पर्क

पत्रिका पड़ताल में आया कि अली अकबर पहले रेलवे स्टेशन पार्किंग में काम करता था। शहर में एक प्रॉपर्टी कारोबारी की हत्या की वारदात के बाद उसका पार्किंग स्टैंड भी छूट गया। हत्या की वारदात में अली अकबर के दोस्त का नाम भी शामिल था। इसके बाद रेलवे स्टेशन से ऑटो रिक्शा चलाने लगा।

रेलवे स्टेशन से धान मंडी तक ऑटो रिक्शा संचालन के दौरान वह लॉरेंस के पंजाब नेटवर्क और फिर आर्थिक तंगी दूर करने के इरादे से पाक आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क में आया। फिर धीरे-धीरे बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गया।

इधर, परिवार, दोस्तों से पूछताछ

अजमेर में अली अकबर के परिजन से गंज थाने में पुलिस, आईबी, सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार घंटों पूछताछ में जुटी है। हालांकि परिजन ने सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष तमाम घटनाक्रम से अनभिज्ञता जाहिर की। सुरक्षा एजेंसियों ने अली अकबर के परिजन के मोबाइल फोन की गहनता से जांच पड़ताल की गई।

ये भी पढ़ें

क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा था अली अकबर उर्फ बाबू? हाथ में RDX और मन में तबाही, खौफनाक कुंडली आई सामने

Also Read
View All

अगली खबर